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70 साल की उम्र में भविष्य का भारत दिखाने वाला मॉडल


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70 साल की उम्र में भविष्य का भारत दिखाने वाला मॉडल

श्रीमाधोपुर के दिव्यांग नवप्रवर्तक करण सिंह शेखावत का जल-ऊर्जा प्रयोग, बिना बिजली ऊँचाई तक पानी पहुँचाने का दावा

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : नैना शेखावत

श्रीमाधोपुर : देश जल संकट, प्रदूषण, बाढ़ और ऊर्जा की गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे समय में सीकर जिले के श्रीमाधोपुर क्षेत्र के जालपाली गांव से एक प्रेरक नवाचार सामने आया है। 70 वर्षीय दिव्यांग करण सिंह शेखावत ने जल, ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो देश के भविष्य के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकता है।

करण सिंह शेखावत ने यह मॉडल कोरोना काल के दौरान घर पर रहते हुए तैयार किया। उन्होंने पाइप, पानी की बाल्टियों और छोटे मॉडलों के जरिए यह सिद्ध करने का दावा किया कि बिना बिजली, बिना नहर और बिना सुरंग बनाए प्राकृतिक जल दबाव के माध्यम से पानी को ऊँचाई तक पहुँचाया जा सकता है। उन्होंने प्रेजेंटेशन के माध्यम से अपने प्रयोगों को समझाया।

प्रदूषण से राहत और कृत्रिम वर्षा का दावा

करण सिंह शेखावत का कहना है कि इस तकनीक के जरिए दिल्ली जैसे महानगरों में कृत्रिम वर्षा संभव है। उनका दावा है कि एक दिन में चार से पांच बार कृत्रिम वर्षा कराकर राजधानी का AQI 100 से नीचे रखा जा सकता है। इससे प्रदूषण के साथ-साथ जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं का भी समाधान संभव होगा।

5200 बांधों से लाखों मेगावाट बिजली का अनुमान

उन्होंने बताया कि देश में मौजूद करीब 5200 बांधों का यदि सही तकनीकी उपयोग किया जाए तो वर्तमान से कई गुना अधिक जल विद्युत ऊर्जा पैदा की जा सकती है। उनका दावा है कि मौजूदा संसाधनों से 40 से 50 लाख मेगावाट तक स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन संभव है, जिससे भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है।

बिना नहर-सुरंग नदियों को जोड़ने का विकल्प

करण सिंह शेखावत का कहना है कि नदियों को जोड़ने के लिए बड़ी नहरें और सुरंगें ही एकमात्र उपाय नहीं हैं। बड़ी पाइपलाइनों के माध्यम से पहाड़ों के ऊपर से पानी ले जाकर नदियों को जोड़ा जा सकता है। इससे कम समय में और बिना पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए जल संकट का समाधान संभव है।

अरावली को हरा-भरा बनाने का दावा

उन्होंने बताया कि इस तकनीक से पानी को उसके स्रोत से दो से तीन गुना ऊँचाई तक पहुँचाया जा सकता है। इससे अरावली पर्वतमाला सहित ऊँचे पहाड़ी क्षेत्रों को हरा-भरा किया जा सकता है, जिससे वर्षा चक्र में भी सुधार होगा।

ग्लेशियर झीलों से आपदा रोकने का सुझाव

करण सिंह शेखावत के अनुसार, उनकी तकनीक से ग्लेशियर क्षेत्रों की झीलों का पानी सुरक्षित तरीके से निकालकर बिजली और सिंचाई में उपयोग किया जा सकता है। इससे बाढ़, भूस्खलन और पहाड़ों के दरकने जैसी आपदाओं को रोका जा सकता है।

वॉटर और पावर ग्रिड का प्रस्ताव

उन्होंने वॉटर ग्रिड और पावर ग्रिड की अवधारणा भी रखी है। उनका मानना है कि वॉटर ग्रिड से पूरे देश में समान जल वितरण और साउथ एशियन पावर ग्रिड से पड़ोसी देशों को बिजली निर्यात किया जा सकता है। इससे भारत 2035 तक विकसित राष्ट्र बन सकता है।

करण सिंह शेखावत का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी की आलोचना नहीं, बल्कि देश के सामने एक व्यावहारिक समाधान रखना है। अब जरूरत है कि सरकार और तकनीकी संस्थान इस मॉडल का परीक्षण कर इसे आगे बढ़ाएं।

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