झुंझुनूं में लोग कीचड़ भरे रास्ते से गुजरने को मजबूर:नगर परिषद की अनदेखी; वार्ड 1 में सालों से जलभराव और टूटी सड़कें
झुंझुनूं में लोग कीचड़ भरे रास्ते से गुजरने को मजबूर:नगर परिषद की अनदेखी; वार्ड 1 में सालों से जलभराव और टूटी सड़कें
झुंझुनूं : झुंझुनूं शहर के विकास को लेकर किए जा रहे दावों के बीच नगर परिषद के वार्ड नंबर 1 से सामने आई तस्वीरें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही हैं। चूरू रोड स्थित बीरबल बाजार के ठीक पीछे बसे इस वार्ड के लोग पिछले कई वर्षों से बदहाली और नारकीय हालात में जीवन जीने को मजबूर हैं। यहां की मुख्य सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है और नगर परिषद द्वारा आज तक नालियों का निर्माण तक नहीं कराया गया।
सालों से जमा है गंदा पानी
नालियों के अभाव में सड़क पर गंदा पानी सालों से जमा रहता है। हालात इतने खराब हैं कि जलभराव के लिए बारिश का इंतजार नहीं करना पड़ता। पूरे साल घुटनों तक पानी भरा रहता है, जो बरसात के मौसम में और भी विकराल रूप ले लेता है। जल निकासी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पूरी गली एक गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है।

घरों के अंदर घुस रहा बदबूदार पानी
सड़क पर पानी का स्तर इतना अधिक है कि लोगों के लिए अपने घरों का मुख्य दरवाजा खोलना भी मुश्किल हो गया है। जैसे ही दरवाजा खोला जाता है, सड़क का बदबूदार और गंदा पानी सीधे घरों में घुस जाता है। इससे न केवल घरों में गंदगी फैल रही है, बल्कि बीमारी फैलने का भी लगातार खतरा बना हुआ है।
बुजुर्ग और बच्चों के लिए निकलना जोखिम भरा
वार्ड के बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए घर से बाहर निकलना किसी खतरे से कम नहीं है। फिसलन, गड्ढों और गंदे पानी के कारण आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। स्कूली बच्चों को इसी पानी से होकर आना-जाना पड़ता है, जिससे अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है।
प्रशासन और नगर परिषद से लगाई गुहार
वार्ड नंबर 1 के निवासियों ने कई बार नगर परिषद और जिला प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। वार्डवासियों का कहना है कि केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हो रहा।
आंदोलन की चेतावनी
वार्डवासियों ने जिला प्रशासन और नगर परिषद आयुक्त से मांग की है कि जल्द से जल्द सड़क का पुनर्निर्माण कराया जाए और जल निकासी की समुचित व्यवस्था की जाए। लोगों का कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन और प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।
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