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2.36 लाख नागरिक बने उपभोक्ता हितों की आवाज, झुंझुनूं उपभोक्ता आयोग के ‘कंज्यूमर्स वॉइस न्यायोत्सव’ ने बनाया रिकॉर्ड


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2.36 लाख नागरिक बने उपभोक्ता हितों की आवाज, झुंझुनूं उपभोक्ता आयोग के ‘कंज्यूमर्स वॉइस न्यायोत्सव’ ने बनाया रिकॉर्ड

2.36 लाख नागरिक बने उपभोक्ता हितों की आवाज, झुंझुनूं उपभोक्ता आयोग के ‘कंज्यूमर्स वॉइस न्यायोत्सव’ ने बनाया रिकॉर्ड

जनमानस शेखावाटी संवाददाता : चंद्रकांत बंका

झुंझुनूं : जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, झुंझुनूं द्वारा शुरू किए गए अभिनव अभियान ‘कंज्यूमर्स वॉइस न्यायोत्सव’ के तहत अब तक 2.36 लाख से अधिक नागरिक उपभोक्ता अधिकारों की आवाज बन चुके हैं। आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील की पहल पर शुरू हुए इस अभियान ने राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 24 दिसंबर तक एक लाख नागरिकों को शपथ दिलाने के लक्ष्य को दोगुने से भी अधिक पार कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने बताया कि जिलेभर में उपभोक्ता अधिकारों को लेकर अभूतपूर्व जागरूकता देखने को मिली है। अब तक 2 लाख 36 हजार 286 नागरिकों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से उपभोक्ता अधिकारों की शपथ ली है। उन्होंने आमजन से अपील करते हुए कहा कि हर खरीद पर बिल लेना और उपभोक्ता अधिकारों को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। इससे न केवल उपभोक्ता सुरक्षित होंगे, बल्कि टैक्स चोरी पर भी अंकुश लगेगा और विकसित भारत के संकल्प को मजबूती मिलेगी।

‘कंज्यूमर्स वॉइस न्यायोत्सव’ में सबसे अधिक भागीदारी विद्यार्थियों की रही है। राजकीय विद्यालयों के 83 हजार 413 विद्यार्थियों, निजी शिक्षण संस्थानों के 1 लाख 17 हजार 899 विद्यार्थियों, 18 हजार 410 शिक्षकों, 13 हजार 955 अभिभावकों और 2 हजार 609 अन्य जागरूक नागरिकों ने उपभोक्ता अधिकारों की शपथ लेकर अभियान को सफल बनाया।

आयोग अध्यक्ष मील ने जानकारी दी कि उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सांयकालीन कोर्ट शुरू करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है। इससे उन उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी जो नौकरी या व्यापार के कारण जिले से बाहर रहते हैं और जिनके प्रकरण लंबित हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष से अवकाश दिवसों में भी ‘न्याय टेबल’ लगाकर आपसी समझाइश के जरिए लोक अदालत की भावना से प्रकरणों का निस्तारण किया जा रहा है। झुंझुनूं जिला उपभोक्ता आयोग ने राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से प्रदेश में सर्वाधिक मामलों का निस्तारण कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

आयोग अध्यक्ष ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की प्रमुख विशेषताओं की जानकारी देते हुए बताया कि इस कानून के तहत केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण को भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाने, दोषपूर्ण वस्तुएं वापस मंगाने और जुर्माना लगाने की शक्तियां दी गई हैं। ई-कॉमर्स कंपनियों को भी कानून के दायरे में लाया गया है, जिससे उपभोक्ताओं को विक्रेता की पूरी जानकारी मिल सके और नकली व भ्रामक उत्पादों पर रोक लगे। साथ ही दोषपूर्ण उत्पाद या लापरवाही से दी गई सेवाओं के लिए निर्माता, विक्रेता और सेवा प्रदाता को जवाबदेह बनाया गया है। भ्रामक विज्ञापनों पर पहली बार 10 लाख रुपये तक जुर्माने और दोहराव पर 50 लाख रुपये तक दंड का प्रावधान किया गया है, जिसमें सेलिब्रिटी भी जिम्मेदार माने जाएंगे।

उन्होंने बताया कि मध्यस्थता के माध्यम से आपसी सहमति से विवादों का समाधान कर समय और खर्च दोनों की बचत की जा सकती है। अब उपभोक्ता अपने निवास स्थान से ही शिकायत दर्ज कर सकता है और ई-जागृति पोर्टल तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की सुविधा भी उपलब्ध है। झुंझुनूं उपभोक्ता आयोग का यह प्रयास उपभोक्ता जागरूकता और त्वरित न्याय की दिशा में एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रहा है।

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