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लूटना मागणी को पंचायत मुख्यालय बनाने की मांग:प्रशासन के फैसले के खिलाफ ग्रामीणों का प्रदर्शन, इस्तीफे की चेतावनी


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लूटना मागणी को पंचायत मुख्यालय बनाने की मांग:प्रशासन के फैसले के खिलाफ ग्रामीणों का प्रदर्शन, इस्तीफे की चेतावनी

लूटना मागणी को पंचायत मुख्यालय बनाने की मांग:प्रशासन के फैसले के खिलाफ ग्रामीणों का प्रदर्शन, इस्तीफे की चेतावनी

सादुलपुर : सादुलपुर क्षेत्र में पंचायत परिसीमन के बाद लूटना क्षेत्र में पंचायत मुख्यालय को लेकर विवाद गहरा गया है। प्रशासन द्वारा लूटना पूर्ण को पंचायत मुख्यालय घोषित करने के फैसले के बाद ग्रामीणों में भारी रोष है। ग्रामीण जोर देकर मांग कर रहे हैं कि लूटना मागणी को ही मुख्यालय बनाया जाए, क्योंकि उनके अनुसार जनसंख्या, भूगोल, पहुंच मार्ग और सुविधाओं के सभी मानदंडों में यह गांव मुख्यालय बनने योग्य है।

ग्रामीणों का कहना है कि लूटना पूर्ण को मुख्यालय घोषित करना गलत है क्योंकि वहां तक जाने के लिए कोई सीधा मार्ग उपलब्ध नहीं है। राष्ट्रीय राजमार्ग-52 और रेलवे लाइन के बीच आने के कारण आवागमन कठिन हो जाता है। जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार लूटना मागणी की जनसंख्या 809 है, जबकि लूटना पूर्ण 641 और लूटना अमीचंद 250 की आबादी वाला है। इसके आधार पर ग्रामीण दावा कर रहे हैं कि सबसे अधिक आबादी वाला लूटना मागणी ही मुख्यालय बनने योग्य था।

प्रदर्शन और विरोध-प्रदर्शनकारी चेतावनी

निर्णय के विरोध में ग्रामीणों ने गांव के मुख्य चौक पर प्रदर्शन किया और सरकार से फैसले की पुनः समीक्षा की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने इस निर्णय को गैर-न्यायसंगत और क्षेत्र के बड़े हिस्से के साथ ‘खुला धोखा’ बताया।

राजनीतिक प्रभाव और चेतावनी

गुलपुरा मंडल के महामंत्री वीरसिंह शर्मा ने आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रभाव में आकर ग्रामीणों के हितों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा, “हर मापदंड में सही होते हुए भी हमारे गांव को पंचायत मुख्यालय नहीं बनाया गया। यह अन्याय है।” शर्मा ने चेतावनी दी कि अगर लूटना मागणी को मुख्यालय नहीं बनाया गया तो वे अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।

वीरसिंह शर्मा ने यह भी कहा कि ग्रामीण इस मुद्दे को मुख्यमंत्री तक ले जाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि चुनाव में गांव ने भाजपा को अन्य दलों की तुलना में अधिक समर्थन दिया, इसलिए इस तरह का निर्णय स्वीकार्य नहीं है।

आंदोलन और भविष्य की रणनीति

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि अगर जल्द फैसले में संशोधन नहीं किया गया तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा। इस दौरान धर्मपाल, जयसिंग, सिलोचना शर्मा, दरियासिंग मेघवाल, महेंद्र जड़िया, होसियार सिंह, संजय घढ़वाल और प्रेम शर्मा सहित कई लोग इस विरोध में शामिल रहे।

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