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बिसाऊ की मूक रामलीला के मुरीद हुए जिला कलेक्टर अरुण गर्ग, मेघनाद वध के बाद 25 फीट के पुतले का दहन


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बिसाऊ की मूक रामलीला के मुरीद हुए जिला कलेक्टर अरुण गर्ग, मेघनाद वध के बाद 25 फीट के पुतले का दहन

चार घंटे तक चला मुखौटाधारी कलाकारों का दंगल, माता दुर्गा की संजीव झांकी पर कलेक्टर ने की पुष्पवर्षा

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : लतीफ खान

बिसाऊ : गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज बिसाऊ की ऐतिहासिक मूक रामलीला की अनूठी परंपरा और जीवंत मंचन ने बुधवार को जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग को भी प्रभावित किया। रामलीला मैदान पहुंचे कलेक्टर ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों का अवलोकन किया। माता दुर्गा की संजीव झांकी पर पुष्पवर्षा कर श्रद्धा प्रकट की और आयोजन की सांस्कृतिक विरासत की सराहना की।

मेघनाद वध के रोमांचक मंचन के दौरान रामलीला मैदान जय श्रीराम और हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। लक्ष्मण के हाथों मेघनाद का वध होने के बाद आतिशबाजी के बीच 25 फीट ऊंचे मेघनाद के पुतले का दहन किया गया। इस दौरान हजारों दर्शकों में उत्साह देखने को मिला।

दुपट्टा ओढ़ाकर और प्रतीक चिह्न भेंटकर किया सम्मान

जिला कलेक्टर के रामलीला मैदान पहुंचने पर चॉइस इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मूक रामलीला ट्रस्टी भामाशाह कमल पोद्दार, संरक्षक जगदीश प्रसाद कसेरा और समिति अध्यक्ष राजेंद्र मिश्रा ने उनका तथा नायब तहसीलदार सुधेश महला का दुपट्टा ओढ़ाकर और प्रतीक चिह्न भेंटकर स्वागत किया। कलेक्टर ने रामलीला के विभिन्न दृश्यों को देखकर इस विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा की सराहना की।

संजीवनी बूटी से लौटी लक्ष्मण की चेतना

रामलीला में रावण के कई योद्धाओं के मारे जाने के बाद उसके पराक्रमी पुत्र इंद्रजीत मेघनाद ने युद्धभूमि में प्रवेश किया। मेघनाद और लक्ष्मण के बीच भीषण युद्ध हुआ। मेघनाद के शक्तिशाली प्रहार से लक्ष्मण मूर्छित हो गए। भाई की स्थिति देखकर भगवान श्रीराम व्याकुल हो उठे और वानर सेना में निराशा छा गई।

संकट की इस घड़ी में हनुमान संजीवनी बूटी लेकर पहुंचे। वैद्य के उपचार से लक्ष्मण की चेतना लौट आई और वानर सेना में फिर उत्साह का संचार हुआ। इसके बाद युद्ध निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया।

मेघनाद का यज्ञ भंग, लक्ष्मण के बाण से हुआ अंत

लक्ष्मण के स्वस्थ होने की सूचना मिलने पर मेघनाद ने अपनी कुलदेवी के मंदिर में यज्ञ शुरू कर दिया। विभीषण के बताए मार्ग पर हनुमान सहित अन्य योद्धाओं ने यज्ञ भंग कर दिया। इसके बाद लक्ष्मण और मेघनाद के बीच निर्णायक युद्ध हुआ, जिसमें लक्ष्मण ने मेघनाद का वध कर दिया। पुत्र की मृत्यु का समाचार मिलने पर रावण शोक में डूब गया और लंका में मातम छा गया। इसके बाद मेघनाद के विशाल पुतले का दहन आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा।

चार घंटे तक मुखौटाधारी कलाकारों का दंगल

बिसाऊ की मूक रामलीला की खास पहचान इसका पारंपरिक मुखौटा दंगल है। खुले रेतीले मैदान में दिन के उजाले में करीब चार घंटे तक लगभग 50 मुखौटाधारी कलाकारों ने नृत्य, अभिनय और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को जीवंत किया। कलाकारों की अनूठी प्रस्तुतियों, राक्षसों की आवाजों और रामायण की चौपाइयों ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।

रामलीला मैदान दर्शकों से खचाखच भरा रहा। स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज से आए प्रवासियों ने भी आयोजन का आनंद लिया। मेघनाद के पुतले का दहन और आतिशबाजी ने कार्यक्रम की भव्यता बढ़ा दी।

समिति पदाधिकारी और गणमान्य लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में कोषाध्यक्ष प्रीतम दाधीच, मंत्री गोपी किशन दाधीच, विजय माटोलिया, संजय पोद्दार, कमल मिश्रा, त्रिलोकचंद शर्मा, श्रीकिशन स्वामी, भवानीशंकर महनसरीया, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष एडवोकेट पवन कुमार धोलपुरिया, मुरारी जोशी और विमल सैनी सहित समिति पदाधिकारी, गणमान्य नागरिक तथा रामलीला प्रेमी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन कपिलेश शर्मा और सुभाष खटीक ने किया।

बिसाऊ की मूक रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। पीढ़ियों से चली आ रही यह अनूठी परंपरा आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

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