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सूरजगढ़ विधायक के बेटे का नामांकन निरस्त, मतदाता बनने के लिए हाईकोर्ट के आदेश पर विवाद


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सूरजगढ़ विधायक के बेटे का नामांकन निरस्त, मतदाता बनने के लिए हाईकोर्ट के आदेश पर विवाद

पंचायत चुनाव में वार्ड 7 से भरा था पर्चा, निर्वाचन आयोग ने मांगी आदेश की सत्यापित प्रति; कलेक्टर बोले—आदेश फर्जी मिला तो दर्ज होगी प्राथमिकी

सूरजगढ़ : पंचायत चुनाव में सूरजगढ़ से कांग्रेस विधायक श्रवण कुमार के बेटे जयप्रकाश का नामांकन निरस्त कर दिया गया है। मामला सूरजगढ़ पंचायत समिति के वार्ड 7 से नामांकन दाखिल करने से जुड़ा है। जयप्रकाश का नाम जीणी ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में नहीं था। नाम जुड़वाने और नामांकन प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट के आदेश की प्रति प्रस्तुत किए जाने पर विवाद सामने आया। निर्वाचन आयोग ने आदेश की सत्यापित प्रति मांगी, जो उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद नामांकन निरस्त कर दिया गया।

नगरपालिका की मतदाता सूची में है नाम

जयप्रकाश का नाम सूरजगढ़ नगरपालिका के वार्ड 25 की मतदाता सूची में दर्ज है। पंचायत चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने जीणी ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का आवेदन किया था। निर्धारित समय सीमा निकल जाने के कारण बूथ स्तरीय अधिकारी ने नाम जोड़ने से मना कर दिया। इसके बाद जयप्रकाश ने 15 अक्टूबर को हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 16 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान अदालत ने अगली तारीख 27 अक्टूबर तय की थी।

इसी बीच जयप्रकाश 16 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करने एसडीएम कार्यालय पहुंचे। निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, नामांकन प्रक्रिया के दौरान हाईकोर्ट के आदेश का प्रिंट प्रस्तुत किया गया। इस पर निर्वाचन अधिकारी ने निर्वाचन आयोग से मार्गदर्शन मांगा। आयोग ने आदेश की सत्यापित प्रति उपलब्ध कराने को कहा, लेकिन प्रति नहीं मिलने पर नामांकन निरस्त कर दिया गया।

फर्जी आदेश मिला तो दर्ज होगी प्राथमिकी

जयप्रकाश ने कहा कि उन्होंने मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी, लेकिन समय सीमा निकलने के कारण नाम नहीं जुड़ पाया। उन्होंने नामांकन पत्र के साथ कोई आदेश लगाने से इनकार करते हुए कहा कि किसी ने एसडीएम को भेजा होगा। इस संबंध में उन्हें जानकारी नहीं है।

एसडीएम एवं निर्वाचन अधिकारी संदीप चौधरी ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश की सत्यापित प्रति मांगी गई थी, जो उपलब्ध नहीं कराई गई। वहीं, झुंझुनूं जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने कहा कि मामले में निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा गया था। यदि अदालत का आदेश फर्जी पाया जाता है, तो प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।

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