बेटी के जन्म पर बेटे जैसी खुशियां, कुआं पूजन से दशोठण तक निभाईं सभी रस्में
शिक्षाविद् बीएल रणवां के परिवार ने पेश की महिला सशक्तिकरण की मिसाल, यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा भी पहुंचे उत्सव में
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : आजाद अहमद खान
झुंझुनूं : बेटियों के सम्मान और समानता का संदेश देने के लिए बड़े मंचों की जरूरत नहीं, बदलाव की शुरुआत अपने घर से भी हो सकती है। इसकी मिसाल नवलगढ़ उपखंड की नवलड़ी ग्राम पंचायत स्थित ढाणी धर्माणा में देखने को मिली। यहां शिक्षाविद् एवं मोटिवेशन गुरु बीएल रणवां और सुमन रणवां के परिवार में पोती आयरा के जन्म पर बेटे की तरह उत्सव मनाया गया। कुआं पूजन से लेकर दशोठण तक सभी पारंपरिक रस्में पूरे उल्लास के साथ निभाई गईं।
बेटी के जन्म की खुशी में ढोल-नगाड़े बजे, बैंड-बाजे और डीजे की धुन पर महिलाओं ने नृत्य किया। उत्सव में सैकड़ों ग्रामीण महिलाएं शामिल हुईं। पंजाब से ढोल बजाने वाले बुलाए गए। परिवार ने यह संदेश दिया कि बेटी का जन्म भी उतनी ही खुशी और सम्मान का अवसर है, जितना बेटे का जन्म। यह आयोजन केवल एक परिवार का उत्सव नहीं, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति बदलती सोच की मिसाल बन गया।
81 साल के दादा और 79 साल की दादी ने भी मनाई खुशी
आयरा के जन्म पर परिवार के बुजुर्ग भी उत्साह से सराबोर नजर आए। 81 वर्षीय बड़े दादा सुलतान सिंह रणवां और 79 वर्षीय बड़ी दादी हरकौरी देवी ने भी खुशियां मनाईं। आयरा की मां आशा और पिता राहुल रणवां ने परिवार के साथ उत्सव में भाग लिया। कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा और भाजपा जिलाध्यक्ष हर्षिनी कुलहरि भी पहुंचे। उन्होंने इस पहल को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाला कदम बताया।

बीएल रणवां ने कहा कि बेटियों के जन्म पर भी खुशियां मनानी चाहिए। उनकी अच्छी परवरिश, संस्कार और बेहतर शिक्षा पर ध्यान देने के साथ ऐसा वातावरण बनाना जरूरी है, जिसमें वे बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सकें। बेटियों के रास्ते में बाधाएं खड़ी करने के बजाय उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देने चाहिए। विकसित भारत के निर्माण में बेटियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
एडीईओ उम्मेद सिंह महला ने कहा कि रणवां ने महिला सशक्तिकरण की शुरुआत अपने घर से की है। यह पहल जिले में सकारात्मक उदाहरण बनेगी और दूसरे परिवार भी इससे प्रेरणा लेंगे। उन्होंने आयरा के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि बेटियां आगे बढ़कर जिले और देश का नाम रोशन करें।

यूडीएच मंत्री बोले—रणवां परिवार ने समाज को दी नई दिशा
मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बेटियों के प्रति समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव आया है। शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और खेलकूद सहित विभिन्न क्षेत्रों में बेटियां अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं। ऐसे में बेटा-बेटी के बीच भेदभाव का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने रणवां परिवार की पहल को बदलते सामाजिक नजरिए का प्रतीक बताया।
ढाणी धर्माणा में बेटी के जन्म पर निभाई गई परंपराओं ने यह संदेश दिया कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का उद्देश्य केवल बेटियों को जन्म लेने का अवसर देना नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर उपलब्ध कराना भी है। इसकी शुरुआत परिवार में बेटी के जन्म को बेटे की तरह उत्सव मानने से होती है।
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