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अंगद ने रावण की सभा में जमाया पैर, लक्ष्मण हुए मूर्छित तो संजीवनी लेकर पहुंचे हनुमान


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अंगद ने रावण की सभा में जमाया पैर, लक्ष्मण हुए मूर्छित तो संजीवनी लेकर पहुंचे हनुमान

अंगद ने रावण की सभा में जमाया पैर, लक्ष्मण हुए मूर्छित तो संजीवनी लेकर पहुंचे हनुमान

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : शहर के खेमका सती मार्ग स्थित नामदेव धर्मशाला के पास हनुमान चौक पर भोलेनाथ कला मंच की ओर से आयोजित रामलीला की आठवीं रात्रि में अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति और कुंभकरण वध के प्रसंगों का मंचन किया गया। कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय और संवादों के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया। इस दौरान दर्शक जय श्रीराम के जयकारों से माहौल को भक्तिमय करते नजर आए।

रामलीला में सबसे पहले अंगद-रावण संवाद का मंचन हुआ। भगवान श्रीराम के दूत अंगद ने रावण की सभा में पहुंचकर उसे माता सीता को सम्मानपूर्वक लौटाने और युद्ध से बचने की सलाह दी। रावण के अहंकार के सामने अंगद ने अपना पैर सभा में जमा दिया और चुनौती दी कि यदि कोई उनका पैर हिला दे, तो श्रीराम की सेना पराजय स्वीकार कर लेगी। रावण की सभा में मौजूद योद्धा अंगद का पैर हिलाने में असफल रहे।

इसके बाद लक्ष्मण और मेघनाद के बीच युद्ध का दृश्य दिखाया गया। मेघनाद की ब्रह्मशक्ति से लक्ष्मण मूर्छित होकर गिर पड़े। लक्ष्मण की हालत देखकर श्रीराम और वानर सेना शोक में डूब गए। इसके बाद हनुमानजी संजीवनी बूटी लेने पहुंचे। संजीवनी मिलने पर लक्ष्मण को होश आ गया। अंत में कुंभकरण वध का मंचन किया गया। दर्शकों ने तालियों और जयकारों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।

रामलीला में मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य तनवीर खान उपस्थित रहे। भोलेनाथ कला मंच के संयोजक प्रमोद प्रजापत, अध्यक्ष भादरमल प्रजापत, राधेश्याम सैनी, पुरुषोत्तम शर्मा, राजकुमार शर्मा, गजानंद गौड़, विष्णु सैनी और विनोद डीडवाणिया सहित अन्य सदस्यों ने माला और दुपट्टा पहनाकर उनका स्वागत किया।

मंच के संयोजक प्रमोद प्रजापत ने बताया कि रामलीला में रावण की भूमिका किशन माटोलिया, अंगद की हरीश शर्मा, श्रीराम की घनश्याम शर्मा, लक्ष्मण की हिमांशु वर्मा, हनुमानजी की जगदीश राहड़, कुंभकरण की प्रेमप्रकाश वर्मा, मेघनाद की चंपालाल प्रजापत और शिव की विठ्ठल शर्मा ने निभाई। रामलीला का संचालन देवकीनंदन प्रजापत ने किया।

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