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विचार की नाव नदी पार करा सकती है, आगे का सफर स्वयं तय करना पड़ता है: प्रो. असगर वजाहत


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विचार की नाव नदी पार करा सकती है, आगे का सफर स्वयं तय करना पड़ता है: प्रो. असगर वजाहत

प्रयास संस्थान का हिंदी साहित्य समारोह आयोजित, डॉ. जीवन सिंह, डॉ. हेतु भारद्वाज, सुनील लोहमरोड़ और मनीष मीणा को साहित्य पुरस्कार

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : प्रयास संस्थान की ओर से रविवार शाम स्थानीय सूचना केंद्र में हिंदी साहित्य समारोह आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात साहित्यकार प्रो. असगर वजाहत ने की। इस दौरान साहित्य, सत्ता, समाज और जनजीवन से जुड़े मुद्दों पर विचार रखे गए। समारोह में चार साहित्यकारों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

प्रो. असगर वजाहत ने कहा कि आज साहित्य के सामने यह सवाल खड़ा किया जाता है कि क्या साहित्य समस्याओं का समाधान कर सकता है। यदि यह सवाल साहित्यकारों के सामने है तो यह बड़ी चुनौती है। चुनौतियों को स्वीकार करना ही साहित्यकार का दायित्व है। उन्होंने कहा कि साहित्य की अनेक भूमिकाएं होती हैं और सत्ता को दिशा देना भी उनमें से एक है। सत्ता का निर्माण केवल शक्ति से नहीं, बल्कि सहमति से होता है और इस सहमति को बनाए रखना जरूरी है।

उन्होंने कहा, “विचार नाव है। विचाररूपी नाव नदी पार करा सकती है, लेकिन नदी पार करने के बाद आगे का सफर स्वयं तय करना पड़ता है।” उन्होंने इतिहास के पुनर्लेखन की आवश्यकता बताते हुए कहा कि जनसाधारण के इतिहास और उसकी यात्रा को दर्ज करना समय की मांग है।

साहित्यकार डॉ. जीवन सिंह ने कहा कि विचारशून्यता के कारण आज समाज अतीतगामी हो रहा है। जीवन के अनुभवों से रचा गया साहित्य जनता से जुड़ा रहता है और वहीं से नए विचार जन्म लेते हैं। उन्होंने कहा कि अतीत का गौरव समझने के लिए अपनी कमियों और रूढ़ियों का मूल्यांकन करना जरूरी है।

डॉ. हेतु भारद्वाज ने कहा कि लेखक के सामने जिंदगी ही सबसे बड़ी चुनौती है। जो व्यक्ति जीवन के अनुभवों को लिखने का साहस करता है, वही साहित्यकार है। जनता से जुड़ाव लेखक की असली पहचान है। युवा साहित्यकार सुनील लोहमरोड़ ने अपनी काव्यात्मक प्रस्तुति दी, जबकि मनीष मीणा ने जल, जंगल और जमीन से जुड़े सवालों के साथ समय को समझने की चुनौती पर विचार रखे।

चार साहित्यकारों को मिले पुरस्कार

समारोह में प्रयास संस्थान की ओर से घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार वर्ष 2025 के लिए अलवर के डॉ. जीवन सिंह और वर्ष 2026 के लिए जयपुर के डॉ. हेतु भारद्वाज को प्रदान किया गया। वहीं रुकमणी वर्मा युवा साहित्यकार पुरस्कार वर्ष 2025 के लिए भोजाण-राजगढ़ के सुनील लोहमरोड़ ‘सोनू’ और वर्ष 2026 के लिए पीलोड़ी-दौसा के मनीष मीणा को दिया गया।

घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार के तहत दोनों साहित्यकारों को 51-51 हजार रुपये, शॉल, साफा और सम्मान पत्र प्रदान किए गए। युवा साहित्यकार पुरस्कार के तहत दोनों विजेताओं को 11-11 हजार रुपये, शॉल, साफा और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया।

साहित्यकारों और गणमान्य लोगों का हुआ सम्मान

समारोह में आयोजन सहयोगी एवं पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी रेखाराम खीचड़, इतिहासकार प्रो. खेमचंद सोनी, पुरस्कृत साहित्यकारों के परिजन रामखिलारी मीणा, नारंगी मीणा, रजनीश भारद्वाज और सुरेंद्र कुमार जैन सहित कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. असगर वजाहत का भी सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में डॉ. भरत ओला, इंजीनियर सोहनलाल फगेड़िया, प्रो. एचआर ईसराण, प्रो. कमल सिंह कोठारी, प्रो. एलएन आर्य, प्रो. राजकुमार लाटा, रामरतन सिहाग, डॉ. रामकुमार घोटड़, नरेंद्र सैनी, विकास मील, मनराज कांटीवाल, मोहनलाल अर्जुन, डॉ. निरंजन चिराणिया, किशोर कुमार निर्वाण, श्यामसुंदर शर्मा, शेरखां मलकांण, जमील चौहान, विनीता स्वामी, गीता रावत, सत्यनारायण बाकोलिया, शैलेंद्र माथुर, श्रीकृष्ण श्योराण, जगदीश प्रजापत, अशोक डूडी, रामगोपाल, हरिसिंह सिरसला, सुधीन्द्र सुधी, पूनमचंद गोदारा, विवेकदीप, देवीलाल महिया, डॉ. कृष्णा जाखड़, शबाना शेख, संतोष रणवां और राहुल शर्मा सहित अनेक साहित्यप्रेमी मौजूद रहे। संस्थान अध्यक्ष डॉ. दुलाराम सहारण ने स्वागत भाषण दिया। संस्थान सचिव कमल शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया।

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