ऊंटों-घोड़ियों का नृत्य… बेरी पशु मेले में उमड़ा रोमांच, दर्शक बोले—वाह!
ऊंटों-घोड़ियों का नृत्य… बेरी पशु मेले में उमड़ा रोमांच, दर्शक बोले—वाह!
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : रविंद्र पारीक
बेरी : बेरी पशु मेला इन दिनों पशुपालकों और पशु प्रेमियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। राजस्थान सहित आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में पशुपालक अपने पशुओं के साथ मेले में पहुंचे हैं। मेले में पशुओं की विभिन्न नस्लों के साथ-साथ पशुपालकों की अनूठी प्रस्तुतियां भी लोगों का ध्यान खींच रही हैं।
मेले में उस समय खासा रोमांच देखने को मिला, जब पशुपालकों ने अपने ऊंटों और घोड़ियों की आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियां पेश कीं। ऊंटों की लयबद्ध चाल और घोड़ियों के मनमोहक अंदाज को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए। प्रस्तुतियों के दौरान दर्शकों ने तालियां बजाकर पशुपालकों का उत्साह बढ़ाया।

इस दौरान पशुपालक नेकीराम गढ़वाल, मांगीलाल एवं शीशपाल फौजी ने अपने ऊंटों और घोड़ियों की शानदार नृत्य प्रस्तुतियां दीं। पशुओं की प्रशिक्षित और आकर्षक प्रस्तुतियों ने मेले में मौजूद दर्शकों का मन मोह लिया। मेले में पहुंचे लोगों ने इन प्रस्तुतियों को अपने कैमरों में भी कैद किया।
पशुपालकों का किया स्वागत
शानदार प्रस्तुतियों के बाद मेला कमेटी की ओर से पशुपालकों का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर मेला कमेटी संयोजक बजरंग सिंह चौहान, कुंभाराम गुर्जर, जेपी पूनिया, मेला प्रभारी हकीलेश, सह प्रभारी सुखराम सारसर एवं मेला प्रशासक हनुमान सिंह ने पशुपालकों का स्वागत किया।

राजस्थान के साथ पड़ोसी राज्यों से भी पहुंचे पशुपालक
मेला मीडिया प्रभारी मनोज गुर्जर ने बताया कि बेरी पशु मेला 27 सितंबर से 5 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। मेले में राजस्थान के प्रत्येक जिले से पशुपालक अपने पशुओं के साथ पहुंचे हैं। इसके अलावा राजस्थान के आसपास के राज्यों पंजाब, हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में पशुपालक मेले में भाग लेने पहुंचे हैं।
मेले में अलग-अलग प्रकार के पशुओं की मौजूदगी, पशुपालकों द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे पारंपरिक करतब एवं आकर्षक प्रस्तुतियां लोगों के लिए विशेष आकर्षण बनी हुई हैं। पशु प्रेमियों और ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले लोगों में मेले को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
बेरी पशु मेला पशुपालन की समृद्ध परंपरा, पशु प्रेम और ग्रामीण संस्कृति का अनूठा संगम बनकर सामने आ रहा है। मेले का समापन 5 अक्टूबर 2026 को होगा।
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