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छात्रहित के मुद्दों पर अभाविप का SFI पर हमला, विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल


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छात्रहित के मुद्दों पर अभाविप का SFI पर हमला, विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल

छात्रसंघ चुनाव समेत पांच सूत्रीय मांगों को लेकर प्रेसवार्ता; पेपर लीक, कथित नकल, प्रश्नपत्र फाड़ने, बैनर क्षतिग्रस्त करने और हिंसा से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग

सीकर : छात्रसंघ चुनाव और विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने मोर्चा खोल दिया है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय इकाई ने प्रेसवार्ता कर छात्रसंघ चुनाव शीघ्र कराने समेत पांच सूत्रीय मांगें उठाईं। साथ ही एसएफआई (SFI) से जुड़े बताए जा रहे विभिन्न विवादित मामलों का हवाला देते हुए संगठन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। अभाविप ने इन मामलों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा आरोप प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।

छात्रसंघ चुनाव समेत ये पांच मांगें

अभाविप ने प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव शीघ्र एवं नियमित कराने, सभी विश्वविद्यालयों में समान अकादमिक कैलेंडर लागू करने, रिक्त पदों पर नियुक्तियां करने, राजकीय महाविद्यालयों में नियमित प्राचार्यों की नियुक्ति तथा विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा विभाग स्थापित करने की मांग उठाई। परिषद का कहना है कि विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर वह लगातार संघर्ष कर रही है। विश्वविद्यालय परिसरों में ऐसा वातावरण होना चाहिए, जहां विद्यार्थी भयमुक्त होकर शिक्षा प्राप्त करने के साथ अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें।

पेपर लीक और कथित नकल का मुद्दा उठाया

प्रेसवार्ता में अभाविप ने एसएफआई से जुड़े बताए जा रहे पुराने मामलों का भी उल्लेख किया। परिषद ने 17 फरवरी 2024 को दैनिक भास्कर में प्रकाशित समाचार का हवाला देते हुए सूरजगढ़ तहसील कमेटी के अध्यक्ष से संबंधित शेखावाटी विश्वविद्यालय के प्रथम वर्ष रसायन विज्ञान के प्रश्नपत्र को कथित रूप से आउट कर पैसे लेने के मामले का जिक्र किया।

अभाविप ने कहा कि यदि कोई संगठन पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर सवाल उठाता है तो उसे अपने संगठन से जुड़े ऐसे आरोपों पर भी जवाब देना चाहिए। हालांकि, परिषद की ओर से उठाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना बाकी है।

इसी क्रम में 28 जुलाई 2026 को एमएससी फॉरेंसिक साइंस परीक्षा के दौरान एसएफआई से जुड़े पदाधिकारी पर कथित नकल के आरोप का भी मुद्दा उठाया गया। परिषद के अनुसार विश्वविद्यालय की फ्लाइंग टीम ने संबंधित विद्यार्थी को पकड़ा और उसके खिलाफ यूएम प्रकरण दर्ज किया गया। अभाविप ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

प्रश्नपत्र फाड़ने के मामले में कार्रवाई का दावा

परिषद ने 18 दिसंबर 2025 को इतिहास की परीक्षा के दौरान मोबाइल से वीडियो बनाने और प्रश्नपत्र फाड़ने की कथित घटना का भी उल्लेख किया। अभाविप का आरोप है कि उसने इस मामले को विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने उठाया, लेकिन कार्रवाई में देरी हुई।परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने 13 अगस्त 2026 को कुलसचिव से मुलाकात कर मामले में कार्रवाई की मांग की। अभाविप के अनुसार इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित छात्र के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई की।

राज्यपाल के कार्यक्रम के बाद बैनर क्षतिग्रस्त करने का आरोप

अभाविप ने 18 जुलाई 2026 को आयोजित शेखावाटी ज्ञानसभा का मामला भी उठाया। कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी मौजूद रहे थे। परिषद का आरोप है कि कार्यक्रम के बाद विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर लगे बैनर को एसएफआई से जुड़े लोगों ने कथित रूप से क्षतिग्रस्त किया और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। अभाविप ने इसे विश्वविद्यालय की गरिमा और संवैधानिक पदों के सम्मान से जोड़ते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

दीक्षांत समारोह में विरोध पर भी सवाल

अभाविप ने शेखावाटी विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह 28 मार्च 2025 और छठे दीक्षांत समारोह 28 मार्च 2026 का भी जिक्र किया। परिषद का आरोप है कि दोनों अवसरों पर एसएफआई की ओर से विरोध प्रदर्शन किए गए। अभाविप ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण अवसर होता है। ऐसे आयोजनों को राजनीतिक विरोध का मंच बनाने से विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय की गरिमा प्रभावित होती है।

विश्वविद्यालय संपत्ति को नुकसान और मारपीट का आरोप

परिषद ने 28 जुलाई 2025 को प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक भवन के बड़े चैनल गेट को क्षतिग्रस्त करने तथा 2 अगस्त 2025 को कथित रूप से बाहरी लोगों को बुलाकर विद्यार्थियों से मारपीट किए जाने के आरोप भी लगाए। अभाविप का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखना हर छात्र संगठन का अधिकार है, लेकिन विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, हिंसा करना या विद्यार्थियों में भय का माहौल पैदा करना छात्रहित नहीं कहा जा सकता।

‘आरोप सही साबित हों तो हो कार्रवाई’

अभाविप पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष नवीन झांझाडिया ने कहा कि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रसंघ चुनाव जल्द करवाए और परिषद की पांच सूत्रीय मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि एसएफआई से जुड़े बताए जा रहे पेपर लीक, परीक्षा में कथित नकल, प्रश्नपत्र फाड़ने, बैनर क्षतिग्रस्त करने, दीक्षांत समारोह में विरोध, विश्वविद्यालय संपत्ति को नुकसान और हिंसा से जुड़े मामलों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। किसी भी संगठन से जुड़े मामले में राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर तथ्यों के आधार पर जांच की जाए और आरोप प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई हो।

झांझाडिया ने कहा कि छात्र राजनीति का आधार शिक्षा, लोकतांत्रिक अधिकार, अनुशासन और विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा होना चाहिए, न कि अराजकता, हिंसा अथवा परीक्षा व्यवस्था को प्रभावित करना। प्रेसवार्ता में अभाविप जयपुर प्रांत के प्रांत सोशल मीडिया सहसंयोजक विकास गुर्जर, प्रांत जनजाति कार्य सह प्रमुख सतवीर लोयल, इकाई मंत्री राजाराम घील, प्रांत कार्यसमिति सदस्य रेणुका चौधरी सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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