पलसाना में बाल श्रम पर बड़ी कार्रवाई, फैक्ट्री से 2 नाबालिग मुक्त
15 और 16 साल के बच्चों से रोजाना करीब 12 घंटे कराया जा रहा था काम, संयुक्त टीम ने किया रेस्क्यू
पलसाना : बाल श्रम की रोकथाम और बच्चों के संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे अभियान के तहत पलसाना फेज-2 स्थित वर्धान एक्सट्रुसिव फैक्ट्री में संयुक्त टीम ने कार्रवाई कर दो नाबालिगों को बाल श्रम से मुक्त करवाया। कार्रवाई सहायक श्रम आयुक्त संदीप चौधरी के निर्देशन में श्रम विभाग, पुलिस और बाल संरक्षण संस्थाओं की संयुक्त टीम ने की।
कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री में 15 और 16 वर्ष के दो नाबालिग काम करते मिले। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दोनों बच्चों से प्रतिदिन करीब 12 घंटे तक काम कराया जा रहा था। टीम ने मौके पर आवश्यक कार्रवाई करते हुए दोनों को कार्यस्थल से मुक्त करवाया।
स्वास्थ्य जांच के बाद बाल कल्याण समिति के समक्ष किया पेश
रेस्क्यू किए गए दोनों नाबालिगों का स्वास्थ्य परीक्षण करवाया गया। इसके बाद उन्हें बाल कल्याण समिति की सदस्य डॉ. पुष्पा सैनी के समक्ष प्रस्तुत किया गया। सीडब्ल्यूसी के आदेश पर दोनों बच्चों को कस्तूरबा सेवा संस्थान, भादवासी में अस्थाई आश्रय दिलाया गया है। यहां उनकी सुरक्षा, देखभाल और आवश्यक काउंसलिंग की व्यवस्था की जाएगी।
संयुक्त टीम ने की कार्रवाई
कार्रवाई में श्रम विभाग से सहायक श्रम आयुक्त संदीप चौधरी, जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन एलायंस एवं गायत्री सेवा संस्थान से अभिषेक बगड़िया और जितेंद्र नाथावतपुरा तथा रानोली थाना से सहायक उप निरीक्षक राजेंद्र सिंह मौजूद रहे।
‘बच्चों की जगह कार्यस्थल नहीं, विद्यालय है’
सहायक श्रम आयुक्त संदीप चौधरी ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। बच्चों की जगह कार्यस्थल नहीं, बल्कि विद्यालय और सुरक्षित वातावरण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाल श्रम की रोकथाम के लिए श्रम विभाग लगातार निरीक्षण और कार्रवाई कर रहा है तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर अभियान जारी रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि रेस्क्यू किए गए बच्चों को केवल कार्यस्थल से मुक्त करवाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके संरक्षण, पुनर्वास और शिक्षा से दोबारा जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी है।
जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन एलायंस एवं गायत्री सेवा संस्थान की टीम ने कहा कि बाल श्रम के खिलाफ अभियान का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित वातावरण, शिक्षा और सम्मानजनक भविष्य से जोड़ना है। प्रशासन, पुलिस, श्रम विभाग, बाल संरक्षण संस्थाओं और समाज के सामूहिक प्रयासों से ही बाल श्रम मुक्त समाज की दिशा में प्रभावी बदलाव लाया जा सकता है।
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