मुख्यमंत्री ने कारगिल शहीद की वीरांगना का सम्मान किया:राज्य स्तरीय समारोह में प्रशस्ति-पत्र और स्मृति चिह्न भेंट किया
मुख्यमंत्री ने कारगिल शहीद की वीरांगना का सम्मान किया:राज्य स्तरीय समारोह में प्रशस्ति-पत्र और स्मृति चिह्न भेंट किया
रानौली : जयपुर में कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सीकर जिले के पलसाना निवासी कारगिल शहीद सीताराम कुमावत की धर्मपत्नी वीरांगना सुनीता देवी को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में उन्हें शॉल, प्रशस्ति-पत्र और स्मृति चिह्न भेंट किए। इस मौके पर देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों और उनके परिजनों के अदम्य साहस, त्याग और समर्पण को नमन किया गया।
सम्मान प्राप्त करने के बाद वीरांगना सुनीता देवी ने शहीद सीताराम कुमावत की स्मृति में राजकीय स्कूल परिसर में स्थापित अधूरी प्रतिमा को पूर्ण कराने की मांग दोहराई। उन्होंने बताया कि कई बार सरकार से मांग करने के बावजूद प्रतिमा का कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका है। वीरांगना ने कहा कि शहीदों की स्मृतियों का संरक्षण नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करेगा।
शहीद सीताराम कुमावत कारगिल युद्ध के दौरान 16 ग्रेनेडियर्स बटालियन में तैनात थे। युद्ध पर जाने से पहले उन्होंने अपने परिवार को पत्र लिखकर चिंता न करने और देश की रक्षा में मजबूती से डटे रहने का संदेश दिया था। कारगिल युद्ध में दुश्मनों से लोहा लेते हुए उन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया और हमेशा के लिए अमर हो गए।
इधर, कारगिल विजय दिवस पर पलसाना स्थित शहीद सीताराम कुमावत राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल परिसर में बने शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पूर्व सैनिकों, स्टू़डेंट्स और ग्रामीणों ने पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उनके अदम्य साहस और बलिदान को याद किया और राष्ट्रसेवा के उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
पलसाना के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल का नामकरण शहीद सीताराम कुमावत के नाम पर किया जा चुका है और शहीद स्मारक भी बनाया गया है। हालांकि, स्कूल परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमा अब भी अधूरी है और खेल स्टेडियम की घोषणा भी अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। कारगिल विजय दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों में वक्ताओं ने कहा कि शहीद सीताराम कुमावत का बलिदान सदैव देशवासियों को राष्ट्रभक्ति, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता रहेगा तथा राष्ट्र उनके सर्वोच्च बलिदान का हमेशा ऋणी रहेगा।
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