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धमोरा में आवारा कुत्तों का आतंक:दो दर्जन से अधिक बकरियों का शिकार, ग्रामीणों ने की कार्रवाई की मांग


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धमोरा में आवारा कुत्तों का आतंक:दो दर्जन से अधिक बकरियों का शिकार, ग्रामीणों ने की कार्रवाई की मांग

धमोरा में आवारा कुत्तों का आतंक:दो दर्जन से अधिक बकरियों का शिकार, ग्रामीणों ने की कार्रवाई की मांग

धमोरा : धमोरा गांव में आवारा और मांसाहारी कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। पिछले कई दिनों में कुत्तों ने गांव के अलग-अलग स्थानों पर दो दर्जन से अधिक भेड़-बकरियों का शिकार किया है, जिससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। ग्रामीण भयभीत हैं और उन्होंने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि कुत्तों के हमलों से बचाव के लिए अब बकरियों को करीब छह फीट ऊंची चारदीवारी के भीतर रखा जाने लगा है। इसके बावजूद कुत्ते दीवार फांदकर अंदर घुस जाते हैं और बकरियों को मार देते हैं। रात में ग्रामीण पहरा देकर पशुओं की रखवाली भी करते हैं, लेकिन कुत्ते मौका मिलते ही हमला कर देते हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि नवलगढ़ की बकरा मंडी में मांस और हड्डियों के कारण बड़ी संख्या में कुत्ते रहते हैं। उनका कहना है कि मंडी से भेड़-बकरियां खरीदने आने वाले कुछ व्यापारी सुबह के समय इन कुत्तों को वाहनों में भरकर ग्रामीण क्षेत्रों में छोड़ जाते हैं, जिसके कारण गांवों में मांसाहारी कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालांकि, इस संबंध में प्रशासनिक स्तर पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अब तक गांव में अलग-अलग स्थानों पर दो दर्जन से अधिक बकरियों का शिकार किया जा चुका है। इनमें विजय सिंह शेखावत की दो बकरियां, लादूराम जाखड़ के दो बकरे एवं एक बकरी, चंद्रवीर सिंह की दो बकरियां, राजेंद्र सिंह की दो बकरियां, हरिराम रणवा की दो बकरियां तथा दलीप सिंह शेखावत की चार बकरियां शामिल हैं। अन्य पशुपालकों के पशु भी इन हमलों का शिकार बने हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में बढ़ते आवारा और मांसाहारी कुत्तों के आतंक पर शीघ्र प्रभावी कार्रवाई की जाए। इसका उद्देश्य पशुपालकों को राहत प्रदान करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना है। इस दौरान उमाशंकर शेखावत, संजू कंवर, रमेश कंवर, संतोष कंवर, सुप्यार कंवर, राज कंवर, संजू कंवर सहित कई अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।

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