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सिर्फ कागजों में मजबूत 35 लाख की सड़क, पहली बरसात में 500 मीटर तक बही


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सिर्फ कागजों में मजबूत 35 लाख की सड़क, पहली बरसात में 500 मीटर तक बही

बारिश ने खोली निर्माण कार्य की पोल, ग्रामीणों ने गुणवत्ता पर उठाए सवाल ग्रामीणों में रोष; पीडब्ल्यूडी ने जांच के दिए आदेश

मंड्रेला : क्षेत्र में मंगलवार को हुई तेज बारिश ने जहां लोगों को भीषण गर्मी से राहत पहुंचाई, वहीं दूसरी ओर विकास कार्यों की गुणवत्ता की पोल भी खोलकर रख दी। सैनीपुरा से तिगियास पंचायत को जोड़ने वाली करीब 1200 मीटर लंबी सड़क पहली ही तेज बारिश का सामना नहीं कर सकी और उसका बड़ा हिस्सा बह गया। महज दो महीने पहले करीब 35 लाख रुपए की लागत से निर्मित इस सड़क का लगभग 500 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क निर्माण कार्य हाल ही में पूरा हुआ था और इसे क्षेत्र के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना बताया गया था। लेकिन पहली ही बारिश में सड़क के बह जाने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सड़क के क्षतिग्रस्त होने से आसपास के गांवों का आवागमन भी प्रभावित हुआ है और लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सड़क पर झरने की तरह बहा पानी

मंगलवार को हुई तेज बारिश के दौरान सड़क पर पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी सड़क के ऊपर से बहने लगा। देखते ही देखते पानी का तेज बहाव सड़क की सतह और उसके नीचे की मिट्टी को काटता चला गया। कई स्थानों पर सड़क पूरी तरह टूट गई, जबकि कुछ जगहों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए।

ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के दौरान सड़क किसी झरने की तरह दिखाई दे रही थी। पानी का बहाव इतना तेज था कि सड़क का बड़ा हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया। इससे स्पष्ट होता है कि निर्माण के दौरान जल निकासी व्यवस्था और तकनीकी मानकों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया।

ग्रामीणों ने लगाए घटिया निर्माण के आरोप

सड़क के क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किया गया और ठेकेदार तथा संबंधित अधिकारियों ने तय मानकों की अनदेखी की।

ग्रामीण मुकेश सैनी ने कहा कि यदि सड़क का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप और गुणवत्तापूर्ण सामग्री से किया गया होता तो वह पहली ही बारिश में नहीं बहती। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसकी वजह से सड़क इतनी जल्दी टूट गई। उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

जनता के पैसे की हो रही बर्बादी : पूर्व सरपंच

पूर्व सरपंच प्यारेलाल ने सड़क निर्माण कार्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मार्ग क्षेत्र की कई पंचायतों और गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसके बावजूद निर्माण कार्य में लापरवाही बरती गई।

उन्होंने कहा कि हर कुछ वर्षों में लाखों रुपए खर्च कर सड़कें बनाई जाती हैं, लेकिन वे कुछ ही दिनों में टूट जाती हैं। इससे सरकारी धन की बर्बादी होती है और आम जनता को परेशानी उठानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि सड़क का पहली बारिश में बह जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

जल निकासी की व्यवस्था नहीं होना बनी बड़ी वजह

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान सबसे बड़ी चूक पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं करना रही। सड़क के दोनों ओर नालियों या पानी निकासी के अन्य साधनों का अभाव था। तेज बारिश के दौरान जब बड़ी मात्रा में पानी एकत्रित हुआ तो उसे निकलने का रास्ता नहीं मिला।

पानी लगातार सड़क के ऊपर से बहता रहा और धीरे-धीरे उसने सड़क की नींव को कमजोर कर दिया। परिणामस्वरूप सड़क का बड़ा हिस्सा कटाव की चपेट में आ गया और बह गया। ग्रामीणों का मानना है कि यदि निर्माण से पहले जल निकासी व्यवस्था पर ध्यान दिया जाता तो इस प्रकार की स्थिति नहीं बनती।

तेज बारिश से रोड के नीचे की मिट्टी बह कर निकल गई।जिससे रोड पर पानी झरने की तरह बहने लगा
तेज बारिश से रोड के नीचे की मिट्टी बह कर निकल गई।जिससे रोड पर पानी झरने की तरह बहने लगा
तेज बारिश के दौरान सड़क नाला बन गई,पानी के साथ पूरी सड़क बहती चली गई
तेज बारिश के दौरान सड़क नाला बन गई,पानी के साथ पूरी सड़क बहती चली गई
सड़क दोनों तरफ से टूट गई जिससे राहगीरों को आने-जाने में परेशानी हुई।
सड़क दोनों तरफ से टूट गई जिससे राहगीरों को आने-जाने में परेशानी हुई।

पीडब्ल्यूडी ने कहा- जांच के बाद होगी कार्रवाई

मामला सामने आने के बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) भी सक्रिय हो गया है। विभाग के एईएन सिकंदर बुडानिया ने बताया कि सड़क क्षतिग्रस्त होने की जानकारी विभाग को मिल चुकी है।

उन्होंने कहा कि जल्द ही मौके का निरीक्षण किया जाएगा और तकनीकी जांच कराई जाएगी। जांच में यदि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की कमी या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सड़क की मरम्मत और आवागमन बहाल करने के लिए आवश्यक कदम भी उठाए जाएंगे।

ग्रामीणों ने उठाई तत्काल मरम्मत और निष्पक्ष जांच की मांग

सड़क टूटने से प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मार्ग की तत्काल मरम्मत करवाई जाए ताकि लोगों को आवाजाही में हो रही परेशानी से राहत मिल सके। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने की भी मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में भी इसी तरह सरकारी धन का दुरुपयोग होता रहेगा। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।

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