विरासत पर लगा ताला: 116 साल पुराना माधव स्कूल हुआ बंद, 1910 में हुई थी शुरुआत, भावुक हुए पूर्व छात्र
विरासत पर लगा ताला: 116 साल पुराना माधव स्कूल हुआ बंद, 1910 में हुई थी शुरुआत, भावुक हुए पूर्व छात्र
सीकर : शहर के महामंदिर रोड स्थित ऐतिहासिक माधव स्कूल पर आखिरकार ताला लग गया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन ने गुरुवार को स्कूल भवन खाली करवा दिया। वर्ष 1899 में अकाल राहत कार्य के तहत राव राजा माधवसिंह द्वारा इस भवन का निर्माण करवाया गया था, जबकि वर्ष 1910 में यहां केवल 7 विद्यार्थियों के साथ स्कूल की शुरुआत हुई थी।
स्कूल के पहले हेडमास्टर बजरंगलाल जोशी थे। यह विद्यालय वर्षों तक शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा और यहां से पढ़कर अनेक विद्यार्थी ऊंचे पदों तक पहुंचे। इनमें राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी, पूर्व विधायक रड़मल सिंह, ठाकुर रिछपाल सिंह बठोठ तथा पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत के भाई बिशन सिंह शेखावत जैसे नाम शामिल हैं।
199 विद्यार्थियों का नामांकन, 13 स्टाफ सदस्य
वर्तमान में स्कूल में 199 विद्यार्थियों का नामांकन तथा 13 कार्मिक कार्यरत हैं। शिक्षा विभाग ने अब इस विद्यालय को एसके अस्पताल के पीछे स्थित प्राथमिक विद्यालय भवन में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है।
मंदिर ट्रस्ट और शिक्षा विभाग के बीच था विवाद
दरअसल, माधव स्कूल भवन कल्याणजी मंदिर ट्रस्ट के स्वामित्व में था। शिक्षा विभाग पहले भवन का किराया देता था, लेकिन बाद में भुगतान बंद हो गया। इसके बाद मंदिर के महंत ने न्यायालय की शरण ली। मामला जिला एवं सत्र न्यायालय, हाईकोर्ट और अंततः सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने भवन का स्वामित्व मंदिर पक्ष को सौंपने का फैसला सुनाया, जिसके बाद प्रशासन ने भवन खाली करवा दिया।
मंदिर महंत विष्णुप्रसाद शर्मा ने बताया कि अब इस भवन में आधुनिक धर्मशाला का निर्माण कराया जाएगा।
“मैं सिर्फ इमारत नहीं था, यादों का घर था…”
स्कूल बंद होने के बाद सोशल मीडिया पर माधव स्कूल के नाम से एक भावुक संदेश भी चर्चा में रहा, जिसमें स्कूल को मानो एक जीवंत पहचान दी गई। संदेश में लिखा गया—
“मैं सिर्फ एक इमारत नहीं था, मैं आपकी यादों का घर था।
मेरे आंगन में गूंजती प्रार्थनाएं, बच्चों की हंसी और ब्लैकबोर्ड पर लिखे सपने आज भी मेरी दीवारों में जिंदा हैं।”
संदेश में पूर्व छात्रों और शहरवासियों से अपील की गई कि वे इस ऐतिहासिक विद्यालय की स्मृतियों को हमेशा अपने दिलों में जीवित रखें।
माधव स्कूल का बंद होना केवल एक भवन का खाली होना नहीं, बल्कि सीकर की शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत के एक अध्याय का समाप्त होना माना जा रहा है।
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