झुंझुनूं में गैस संकट के बीच लकड़ी भी महंगी, होटल-ढाबों पर बढ़ा आर्थिक दबाव, प्रति किलो लकड़ी के 5 रुपए बढ़े
झुंझुनूं में गैस संकट के बीच लकड़ी भी महंगी, होटल-ढाबों पर बढ़ा आर्थिक दबाव, प्रति किलो लकड़ी के 5 रुपए बढ़े
झुंझुनूं। जिले में इन दिनों ईंधन संकट ने आमजन और कारोबारियों की परेशानी बढ़ा दी है। एक ओर कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और उनकी उपलब्धता भी कम हो गई है, वहीं दूसरी ओर वैकल्पिक ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी के दामों में भी अचानक उछाल आ गया है। पहले 8 रुपए प्रति किलो मिलने वाली सूखी लकड़ी अब 13 रुपए किलो बिक रही है। इसका सीधा असर छोटे होटल, ढाबा संचालकों और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है।
गैस संकट के चलते भट्टियों का सहारा
शहर के बस डिपो, रेलवे स्टेशन, तीन नंबर रोड और सीकर रोड क्षेत्र के कई ढाबों और होटलों में अब गैस बर्नर की जगह लकड़ी की भट्टियां जलती दिखाई दे रही हैं। होटल संचालक कुर्बान अली ने बताया कि पहले लकड़ी आसानी से कम कीमत में मिल जाती थी, लेकिन गैस संकट बढ़ने के साथ ही लकड़ी के दाम भी बढ़ा दिए गए। उन्होंने कहा कि भट्टी पर खाना बनाने में अधिक समय और मेहनत लगती है, जिससे लागत बढ़ रही है।
कमर्शियल सिलेंडर पहुंचा 3135 रुपए
19 किलो वाला कमर्शियल गैस सिलेंडर अब 3135 रुपए तक पहुंच चुका है। वहीं 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर पर भी 261 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। व्यापारियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और आपूर्ति प्रभावित होने के कारण पिछले दो महीनों में गैस कंपनियों ने चार बार कीमतें बढ़ाई हैं। इस दौरान सिलेंडर के दामों में कुल 1329 रुपए तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
कालाबाजारी की शिकायतें
गैस की कमी के बीच बाजार में कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आने लगी हैं। व्यापारियों का आरोप है कि जरूरत के समय सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो रहे, जबकि कुछ लोग ऊंचे दामों पर बिक्री कर रहे हैं।
ग्राहकों की थाली पर असर
ईंधन महंगा होने का असर अब सीधे खाने की कीमतों पर दिखाई देने लगा है। कई होटल और ढाबा संचालकों ने मेन्यू में बदलाव करते हुए ऐसी सब्जियां कम बनानी शुरू कर दी हैं, जिन्हें पकाने में ज्यादा गैस या आंच की जरूरत होती है। वहीं कई स्थानों पर थाली के दाम 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ा दिए गए हैं। लकड़ी की भट्टी पर खाना बनने में अधिक समय लगने से ग्राहकों का इंतजार भी बढ़ गया है।
हॉस्टलों में भी बढ़ी चिंता
चूरू रोड, मंडावा रोड, हाउसिंग बोर्ड और पंचदेव मंदिर क्षेत्र के हॉस्टलों में रहने वाले छात्र भी इस संकट से प्रभावित हो रहे हैं। हॉस्टल संचालकों का कहना है कि कमर्शियल सिलेंडर की कमी के कारण समय पर भोजन तैयार करना मुश्किल हो रहा है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो मेस शुल्क बढ़ाना पड़ सकता है।
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