[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

कलेक्टर ने स्कूल का खेल मैदान रिसोर्ट के लिए दिया:हाईकोर्ट ने रोक लगाई, सैनिक कल्याण बोर्ड चेयरमैन से जुड़ी है कंपनी


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
टॉप न्यूज़राजस्थानराज्यसीकर

कलेक्टर ने स्कूल का खेल मैदान रिसोर्ट के लिए दिया:हाईकोर्ट ने रोक लगाई, सैनिक कल्याण बोर्ड चेयरमैन से जुड़ी है कंपनी

कलेक्टर ने स्कूल का खेल मैदान रिसोर्ट के लिए दिया:हाईकोर्ट ने रोक लगाई, सैनिक कल्याण बोर्ड चेयरमैन से जुड़ी है कंपनी

सीकर : जिले में सरकारी स्कूल के खेल मैदान को निजी कंपनी को आवंटित करने का मामला तूल पकड़ गया है। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कलेक्टर सीकर के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।

मामला बाजौर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल से जुड़ा है, जहां वर्ष 2023 में स्कूल को खेल मैदान के लिए 2 हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई थी। आरोप है कि कलेक्टर ने इस जमीन का आवंटन निरस्त कर इसे मैसर्स बाजोर डेजर्ट सफारी एंड रिसोर्ट को दे दिया, जो यहां रिसोर्ट और डेजर्ट सफारी विकसित करना चाहती थी। बताया जा रहा है कि यह कंपनी सैनिक कल्याण बोर्ड के चेयरमैन एवं पूर्व विधायक प्रेम सिंह बाजौर से जुड़ी हुई है।

इस निर्णय के खिलाफ स्थानीय लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 5 फरवरी 2026 के कलेक्टर आदेश पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार, राजस्व विभाग, जिला कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई तक कलेक्टर के आदेश का क्रियान्वयन पूरी तरह स्थगित रहेगा और स्कूल पहले की तरह खेल मैदान का उपयोग करता रहेगा।

प्रिंसिपल के पत्र के आधार पर हुआ निरस्तीकरण
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता केतन धाभाई ने कोर्ट को बताया कि स्कूल प्रिंसिपल ने स्कूल डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट कमेटी की बैठक के बाद कलेक्टर को पत्र लिखकर कहा था कि खेल मैदान स्कूल से करीब 400 मीटर दूर है, जिससे छात्रों को परेशानी होती है। इसी आधार पर कलेक्टर ने आवंटन निरस्त कर दिया, जबकि स्कूल को वैकल्पिक जमीन नहीं दी गई।

चार दिन बाद निजी कंपनी को आवंटन
अधिवक्ता ने यह भी बताया कि आवंटन निरस्त करने के महज चार दिन बाद, 19 फरवरी 2026 को वही जमीन निजी कंपनी को आवंटित कर दी गई। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह पूरा मामला निजी फर्म को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया।

कोर्ट में यह भी तर्क दिया गया कि प्रिंसिपल को इस प्रकार की सिफारिश करने का अधिकार नहीं था और 400 मीटर की दूरी को अधिक नहीं माना जा सकता।

Related Articles

Mantratoto luwakpoker aladin66 tupaiwin rupiah89 kios77 TOKO22 situs raffi ahmad