बांग्लादेश मठ में कुरान के साथ पढ़ते हैं गीता के श्लोक, विवेकानंद को पढ़ता है सिर्फ एक मुस्लिम देश – डॉ जुल्फिकार
बांग्लादेश मठ में कुरान के साथ पढ़ते हैं गीता के श्लोक, विवेकानंद को पढ़ता है सिर्फ एक मुस्लिम देश - डॉ जुल्फिकार
झुंझुनूं : युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अर्चना की जाती है। उनके विचारों को मठ -मिशन और उन्हीं के अनुयायियों द्वारा विश्व के बड़े – बड़े देशों में प्रचार – प्रसार किया जा रहा है जिसके कारण देश – विदेश में सैकड़ों भक्त काम कर रहे हैं। खास बात यह है कि जिस सक्रियता से भारत में स्थित रामकृष्ण मठ व रामकृष्ण मिशन संस्थाएं कार्य कर रहे हैं। उसी सक्रियता से विदेशों में भी कार्यरत हैं। स्वामी विवेकानंद पर कई वर्षों से शोध कार्य करने वाले एक मुस्लिम शोधकर्ता डॉ. जुल्फिकार के अनुसार वर्तमान समय में विश्व में कुल 295 रामकृष्ण मठ एवं रामकृष्ण मिशन संस्थाएं कार्यरत हैं। भारत में 226 और विदेशों में 69 संस्थाएं कार्यरत हैं।
मुस्लिम देश सिर्फ बांग्लादेश में है रामकृष्ण मठ
स्वामी विवेकानंद के बारे में कई तथ्य सामने आए है लेकिन उनके बारे में एक चौंकाने वाली जानकारी बांग्लादेश से आई है जो विश्व मुस्लिम बिरादरी में एकमात्र देश है। जहां स्वामी विवेकानंद को जाना और माना जाता है। आज वहां 27 रामकृष्ण मठ है जहां स्वामी विवेकानंद के विचारों का प्रचार होता है जिन्हें ग्रहण करने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग ही हैं।
अकेले मुस्लिम देश में है 27 रामकृष्ण मठ
विश्व में बांग्लादेश ही एक ऐसा मुस्लिम देश जहां आज 27 रामकृष्ण मठ एवं रामकृष्ण मिशन संस्थाएं कार्यरत हैं। देश के ढाका, बागेरहाट, बलियाटी, बरीसाल, चांदपुर, चितगोंगा, फरीदपुर, धोरला, कोमिल्ला, दिनाजपुर, फरीदपुर, हबीबगंज, जैसोर, नाराइल, मैमन सिंह, नारायणगंज, रंगपुर, सीताकुंड सिलहट के अतिरिक्त अलग – अलग जगह 8 रामकृष्ण मिशन के छात्रावास कार्यरत हैं।

देश के पहले मुस्लिम शोधकर्ता बनें
झुंझुनूं जिले एक छोटे से गांव भीमसर के मुस्लिम शोधकर्ता डॉ. जुल्फिकार ने जब स्वामी विवेकानंद के बारे में और अधिक रिसर्च करने के लिए उन्होंने मुस्लिम देशों में रामकृष्ण मिशन के मठ तलाशें तो कहीं भी उनका अस्तित्व नहीं था। सिर्फ बांग्लादेश ही वह मुस्लिम देश हैं जहां स्वामी विवेकानंद के विचारों का प्रसार – प्रचार करने वाले रामकृष्ण मठ एवं मिशन है। 15 दिन तक बांग्लादेश (ढाका) रामकृष्ण मठ में रहकर शोध कार्य किया। बाद में बांग्लादेश के मठ ने मुझे पत्र लिखकर बताया कि मैं पहला ऐसा भारतीय मुस्लिम युवा और प्राध्यापक हूं, जिसने मठ में आकर संतों के बीच समय बिताकर स्वामीजी को गहराई से जानने की कोशिश की।
बच्चे कुरान के साथ पढ़ते हैं गीता के श्लोक
बांग्लादेश ढाका रामकृष्ण मठ मे एक खास बात देखने को मिली वहां मठ में संचालित सीनियर विद्यालय की प्रार्थना सभा में न केवल कुरान की आयतें बल्कि गीता के श्लोक भी पढ़ें जाते हैं। मठ के द्वारा जीविका कमाने के जो काम किए जाते हैं, उनमें मुस्लिम महिलाएं बढ़- चढ़ कर भाग लेती है।
किस देश में कितनी संस्थाएं कार्यरत हैं
भारत में 226, बांग्लादेश 27, अमेरिका 15, ब्राजील 3, कनाडा 2, रूस 2, दक्षिण अफ्रीका 2, अर्जेंटीना 1, ऑस्ट्रेलिया 1, फिजी 1, फ्रांस 1, जर्मनी 1, आयरलैंड 1, जापान 1, मलेशिया 1, माॅरीशस 1, नेपाल 1, नीदरलैंड्स 1, न्यूजीलैंड 1, फिलीपींस 1, सिंगापुर 1, श्रीलंका 1, स्विट्जरलैंड 1, इंग्लैंड 1 और ज़ाम्बिया में 1 संस्था कार्यरत हैं।
इनका कहना है –
बांग्लादेश के 27 रामकृष्ण मठों में सबसे पहले ढाका में 1899 में रामकृष्ण मठ की स्थापना की गई। जो 127 साल से स्वयं की मुक्ति और जगत् के कल्याण हेतु कार्य कर रहा है। – डॉ. जुल्फिकार, भीमसर, शोधकर्ता और लेखक
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