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ओमलो की अंतरराष्ट्रीय गूंज: 19 अवॉर्ड जीतकर रचा इतिहास


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ओमलो की अंतरराष्ट्रीय गूंज: 19 अवॉर्ड जीतकर रचा इतिहास

ओमलो की अंतरराष्ट्रीय गूंज: 19 अवॉर्ड जीतकर रचा इतिहास

झुंझुनूं : शेखावाटी अंचल की मिट्टी से जुड़ी संवेदनशील कहानी पर आधारित फिल्म ‘ओमलो’ ने राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी अलग पहचान बना ली है। अब तक 19 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम कर चुकी इस फिल्म ने क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है।

फिल्म के निर्माता, लेखक और निर्देशक सोनू रणदीप हैं, जो झुंझुनूं जिले के कोलिंडा का बास के निवासी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने ग्रामीण जीवन की सच्चाई और सामाजिक बदलाव की मार्मिक कहानी को बड़े परदे पर उतारकर यह साबित किया है कि जुनून और लगन से हर मंज़िल हासिल की जा सकती है।

गांव, दर्द और बदलाव की संवेदनशील कहानी

‘ओमलो’ की कहानी सात वर्षीय बालक और उसके आसपास के सामाजिक परिवेश के इर्द-गिर्द बुनी गई है। फिल्म में ग्रामीण जीवन की सादगी, रिश्तों की गहराई और बदलते सामाजिक मूल्यों को बेहद प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है। यह केवल एक परिवार की कथा नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने वाला प्रयास है।

विभिन्न फिल्म समारोहों में फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशन और सामाजिक विषय पर आधारित प्रस्तुति जैसी कई श्रेणियों में सम्मान मिल चुका है। समीक्षकों ने इसकी सशक्त पटकथा, संवेदनशील निर्देशन और प्रभावशाली अभिनय की खुलकर सराहना की है।

शेखावाटी की संस्कृति को मिला वैश्विक मंच

स्थानीय लोगों का कहना है कि सोनू रणदीप ने शेखावाटी की संस्कृति, बोली और परंपराओं को वैश्विक मंच पर पहुंचाकर जिले का नाम रोशन किया है। उनकी यह उपलब्धि न केवल झुंझुनूं बल्कि पूरे अंचल के लिए गर्व का विषय बन गई है।

‘ओमलो’ की सफलता ने क्षेत्र के युवाओं को यह संदेश दिया है कि बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए महानगरों की जरूरत नहीं, बल्कि मजबूत सोच और सच्ची लगन की आवश्यकता होती है। फिल्म की यह ऐतिहासिक उपलब्धि जिले में रचनात्मक गतिविधियों को नई दिशा देने का कार्य कर रही है।

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