‘झुंझुनूं में मेडिकल-स्टाफ की कमी, प्रिंसिपल पद खत्म कर रहे’:प्रदर्शनकारी बोले- कार्रवाई नहीं हुई तो विरोध जारी रहेगा; काली पट्टी बांधकर काम करने आए
'झुंझुनूं में मेडिकल-स्टाफ की कमी, प्रिंसिपल पद खत्म कर रहे':प्रदर्शनकारी बोले- कार्रवाई नहीं हुई तो विरोध जारी रहेगा; काली पट्टी बांधकर काम करने आए
झुंझुनूं : अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ (अरिसदा), झुंझुनूं के आह्वान पर जिले भर के चिकित्सक आंदोलन पर हैं। मामला गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) के प्रिंसिपल डॉ. राकेश साबू से जुड़ा है। आरोप है की डॉ. साबू ने डॉक्टरों से 6 पदों को खत्म कर दिया है। ऐसे में आंदोलन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वैसे ही हम स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में हमने काली पट्टी बांधकर विरोध जताने का फैसला लिया है। जब तक डॉ. साबू पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
400 चिकित्सक आंदोलन की राह पर
जिले के लगभग 175 स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत करीब 400 चिकित्सकों ने एकजुटता दिखाते हुए विरोध दर्ज कराया है। अरिसदा प्रवक्ता डॉ. विजय झाझड़िया ने बताया कि दौसा और हनुमानगढ़ जिलों के चिकित्सक संघों ने भी इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। मामले की गंभीरता से प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी को अवगत करा दिया गया है। मुख्यमंत्री, चिकित्सा मंत्री और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) तक ज्ञापन के माध्यम से शिकायत पहुंचाई जा चुकी है।
बिना अनुमति बर्खास्तगी पर उठे सवाल
अरिसदा महासचिव डॉ. राजेन्द्र ढाका ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सेवारत पदनामित चिकित्सक बिना किसी अतिरिक्त मानदेय के मेडिकल कॉलेज में शिक्षण सेवाएं दे रहे थे। फार्मैकोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में फैकल्टी की भारी कमी है। इन पदनामित डॉक्टरों की वजह से ही NMC ने कॉलेज को मान्यता दी थी। ऐसे में राज्य सरकार और NMC की अनुमति के बिना चिकित्सकों को बर्खास्त करना पूरी तरह निंदनीय है।

बोले- मरीजों की तकलीफ देखते हुए काम बंद नहीं किया
अरिसदा अध्यक्ष डॉ. एस.ए. जब्बार ने कहा कि चिकित्सक अपनी जिम्मेदारी के प्रति सजग हैं। मरीजों को कोई असुविधा न हो, इसीलिए अभी केवल काली पट्टी बांधकर प्रतीकात्मक विरोध किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही प्रशासन ने उचित कदम नहीं उठाए, तो चिकित्सक पूर्ण कार्य बहिष्कार पर जाने को मजबूर होंगे।
डॉक्टरों का आरोप है कि डॉ. साबू की कार्यशैली के कारण चिकित्सा वर्ग अपमानित महसूस कर रहा है। वर्तमान में माइक्रोबायोलॉजी और फार्मैकोलॉजी विभागों में फैकल्टी न होने से शैक्षणिक कार्य भी प्रभावित हो रहा है। जिले भर के वरिष्ठ चिकित्सकों, जिनमें डॉ. पुष्पा रावत, डॉ. जगदेव सिंह, डॉ. बंशीधर झाझड़िया, डॉ. मधु तंवर और डॉ. कपूर थालौर सहित अन्य शामिल हैं, ने साबू के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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