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सुर्खियों में सवाल: राजस्थानी सिनेमा, साहित्य और भाषा के लिए बजट में क्या है?


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सुर्खियों में सवाल: राजस्थानी सिनेमा, साहित्य और भाषा के लिए बजट में क्या है?

सुर्खियों में सवाल: राजस्थानी सिनेमा, साहित्य और भाषा के लिए बजट में क्या है?

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष शंकर गोरा बुधवार को चूरू में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ के आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक सवाल पर असहज नजर आए।

पत्रकारों ने उनसे पूछा कि राज्य बजट में राजस्थानी सिनेमा, साहित्य और भाषा के लिए क्या प्रावधान किया गया है? इस पर गोरा स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। उन्होंने राजस्थानी प्रवासी सम्मेलन और पर्यटन से जुड़े विषयों का जिक्र किया, लेकिन मूल सवाल पर ठोस जानकारी नहीं दे पाए। दोबारा पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्होंने बजट का वह हिस्सा नहीं पढ़ा है। इस पर मौजूद पत्रकारों ने टिप्पणी की कि बजट में इस विषय पर कुछ है ही नहीं। अंततः गोरा ने कहा कि वे इस संबंध में मांग रखेंगे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गोरा ने भाजपा सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि युवाओं का भविष्य सुरक्षित है और सरकार विकास के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष बसंत शर्मा, युवा नेता अभिषेक चोटिया, भाजयुमो जिलाध्यक्ष गोपाल बालान, महेंद्र न्यौल, रामकेश मीणा, लोकेश चाहर, सत्येंद्र त्यागी सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रवक्ता राकेश शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी को इस विषय पर पुनर्विचार करना चाहिए। वहीं फिल्म निर्माता-निर्देशक व लेखक राजेन्द्रसिंह शेखावत ने कहा कि राजस्थानी सिनेमा, साहित्य और भाषा की अनदेखी बड़ी भूल है। उन्होंने मांग की कि लंबित राजस्थानी फीचर फिल्मों को अनुदान जारी किया जाए, साहित्य अकादमियों में अध्यक्षों की नियुक्ति की जाए तथा राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने के प्रयास तेज किए जाएं। मामला अब राजनीतिक और सांस्कृतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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