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उर्स-ए-कादरी पर ‘फैजाने औलिया कॉन्फ्रेंस’ आयोजित, देर रात तक डटे रहे श्रोता


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उर्स-ए-कादरी पर ‘फैजाने औलिया कॉन्फ्रेंस’ आयोजित, देर रात तक डटे रहे श्रोता

उर्स-ए-कादरी पर ‘फैजाने औलिया कॉन्फ्रेंस’ आयोजित, देर रात तक डटे रहे श्रोता

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : अंचल के महान सूफी विद्वान हजरत अल्लामा मौलाना मुफ्ती सैयद इनायतुल्लाह शाह कादरी (रह.) एवं हजरत सैयद मोहम्मद सिद्दीक शाह कादरी के वार्षिक उर्स-ए-कादरी के अवसर पर ‘फैजाने औलिया कॉन्फ्रेंस’ का भव्य आयोजन किया गया। देर रात तक चले इस कॉन्फ्रेंस में बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे और सूफियाना कलाम व तकरीरों का आनंद लेते रहे।

कार्यक्रम का आगाज़ मौलाना तय्यब ने तिलावत-ए-कुरआन पाक से किया। इसके बाद नन्हे बालक हसनैन हैदर ने अपनी रचना “छूटे ना कभी तेरा दामन” प्रस्तुत कर माहौल को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।

मुख्य रूप से आमंत्रित फखरे राजस्थान हाफिज नौशाद अहमद बीकानेरी ने सैयद मोहम्मद अनवर नदीम उल कादरी की रचना “काफिला नूर का और क्या चाहिए, मिल गए मुस्तफा और क्या चाहिए” को अपने मधुर स्वर में पेश कर महफिल को झूमने पर मजबूर कर दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हमें औलिया-ए-किराम की शिक्षाओं को अपनाकर स्वयं को और समाज को बुराइयों से बचाना चाहिए। उन्होंने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया।

कॉन्फ्रेंस की सदारत कर रहे शहर इमाम सैयद मोहम्मद अनवर नदीम उल कादरी ने कहा कि हमें अपनी नस्लों को हर तरह की बुराई से सुरक्षित रखने का संकल्प लेना होगा। उन्होंने जकात अदा करने और जरूरतमंदों की मदद करने का आह्वान किया।

खानकाह-ए-कादरिया के पीठाधीश्वर सैयद अबरार हुसैन कादरी ने उर्स के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।

कॉन्फ्रेंस में मौलाना सैयद गुलाम, अहमद अली शाह (शहर काजी), मुस्तफा कादरी, सैयद मोहम्मद ताबिश हुसैन कादरी, मंजूर आलम, रिहान मुस्तफा, सैयद नईम, सैयद अकरम, सैयद सलीम चूरवी, हसनैन, हसन यासिर सहित कई उलेमा-ए-किराम व गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मौलाना जमील बीकानेरी ने किया तथा अंत में दुरूदो-सलाम के साथ कॉन्फ्रेंस का समापन हुआ।

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