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खेतड़ीनगर में श्रमिक संगठनों ने किया कार्य बहिष्कार:मांगों को लेकर की नारेबाजी, बोले- श्रम सहिंता में अधिकार हो रहे कम


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खेतड़ीनगर में श्रमिक संगठनों ने किया कार्य बहिष्कार:मांगों को लेकर की नारेबाजी, बोले- श्रम सहिंता में अधिकार हो रहे कम

खेतड़ीनगर में श्रमिक संगठनों ने किया कार्य बहिष्कार:मांगों को लेकर की नारेबाजी, बोले- श्रम सहिंता में अधिकार हो रहे कम

खेतड़ीनगर : खेतड़ीनगर में खेतड़ी ताम्बा श्रमिक संघ (एटक) ने केंद्रीय श्रम संगठनों के आह्वान पर गुरुवार को कार्य बहिष्कार किया। श्रमिकों ने अपनी मांगों को लेकर मुख्य गेट पर नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन किया। केटीएसएस के महामंत्री बिड़दूराम सैनी ने बताया-केंद्रीय श्रम संघों ने यह हड़ताल सरकार द्वारा 21 नवंबर 2025 को लागू की गई चार श्रम संहिताओं और श्रम शक्ति नीति 2025 के विरोध में बुलाई है।

सैनी के अनुसार, ये नई संहिताएं भारत के मजदूर वर्ग द्वारा पिछले 100 वर्षों के संघर्ष से हासिल किए गए अधिकारों को कम या समाप्त कर देंगी। इनमें नियोजकों की जिम्मेदारियों और सजाओं में भारी छूट दी गई है, जबकि मजदूरों और यूनियनों के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि इन संहिताओं से यूनियन बनाना और चलाना कठिन हो जाएगा, साथ ही मजदूरों की सौदेबाजी की शक्ति (बार्गनिंग पॉवर) कमजोर होगी। जांच और कार्यवाही के अधिकार लगभग समाप्त हो जाएंगे और बड़ी संख्या में कामगार कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे। कारखाना की परिभाषा में कामगारों की संख्या (बिजली सहित) 10 से 20 और (बिना बिजली) 20 से 40 कर दी गई है, जबकि छंटनी, बंदी और स्थायी आदेशों में यह संख्या 100 से 300 कर दी गई है।

इस स्थिति को देखते हुए खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स में स्थायी और ठेका कामगारों के साथ-साथ उद्योग और जिले की मांगों के लिए हड़ताल का नोटिस दिया गया था।

4 फरवरी को हुई थी वार्ता

इस संबंध में 4 फरवरी को क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय) जयपुर और 9 फरवरी को उपमुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) अजमेर कैंप जयपुर में समझौता वार्ता हुई थी। एचसीएल प्रबंधन के साथ विचार-विमर्श के बाद प्रत्येक पारी में दो घंटे का कार्य बहिष्कार कर विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया। इस निर्णय के संबंध में केसीसी के कार्यपालक निदेशक जीडी गुप्ता को एक ज्ञापन भी सौंपा गया।

ये रहे मौजूद

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान ओमप्रकाश, घीसाराम मीणा, बाबूलाल सैनी, ओमप्रकाश लाम्बा, जगदीश मीणा, तेजाराम, उम्मेद मीणा, विनय त्यागी, ख्याली राम, अनूप सोमरा, बाबूलाल छावड़ी, चांद मोहन, कुलदीप सक्सेना, सुमेर, मोतीलाल, हरिसिंह, घनश्याम दास, रमेश सैनी सहित कई श्रमिक मौजूद रहे।

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