NH-311 के एकतरफा भूमि अधिग्रहण का विरोध
छावसरी में सर्वे पर उठे सवाल, शहीद व पूर्व सैनिक परिवारों ने जताया आक्रोश
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : चंद्रकांत बंका
झुंझुनूं। प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग 311 (सिंघाना–टीटनवाड़) के कि.मी. 39.200 से 40.800, तन छावसरी क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। पीड़ित खातेदारों और मकान मालिकों ने आरोप लगाया है कि पहले से बनी सड़क का मध्य छोड़कर एक तरफा उत्तर दिशा की भूमि अधिग्रहित कर सड़क निर्माण का प्रयास किया जा रहा है, जिससे कई परिवारों के मकान और कृषि भूमि प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि भारत सरकार के राजपत्र दिनांक 20 जनवरी 2026 में भूमि अधिग्रहण संबंधी प्रकाशित अधिसूचना एवं नक्शे के अवलोकन के बाद यह स्थिति सामने आई है। उनका कहना है कि 18 जनवरी 2026 को एक निजी समाचार पत्र में प्रकाशित खबर में सड़क के दोनों तरफ भूमि पर टू-लेन निर्माण का उल्लेख था। वहीं राजपत्र में भी सड़क के चौड़ीकरण की बात कही गई है। सोशल मीडिया पर प्रचारित फोरलेन का नक्शा भी पहले से बनी सड़क के मध्य को आधार मानकर तैयार किया गया था।
“प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत” का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क के अलाइनमेंट के नाम पर प्रभावशाली लोगों के हित में एकतरफा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इससे कई परिवारों के पक्के मकान व कृषि भूमि प्रभावित हो रहे हैं।
प्रभावितों में अमर शहीद छत्तरपाल सिंह का परिवार भी शामिल है। बताया गया कि शहीद परिवार ने अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश को छोड़कर शहीद पैकेज के तहत वीर भूमि झुंझुनूं के छावसरी गांव में भूमि खरीदकर मकान का निर्माण करवाया था। इसके अलावा भूतपूर्व सैनिक बनवारीलाल, शीशराम, सैनिक अनिल के पिता सुभाष सहित अनेक कास्तकार और मकान मालिक भी प्रभावित बताए जा रहे हैं।
निष्पक्ष सर्वे की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रस्तावित एनएच-311 के उक्त हिस्से का सर्वे पुनः एक निष्पक्ष टीम से कराया जाए तथा सड़क का निर्माण पहले से बनी सड़क के मध्य को आधार मानकर दोनों तरफ समान रूप से भूमि अधिग्रहित कर किया जाए।
इस संबंध में प्रशासक ग्राम पंचायत छावसरी, शहीद की माताजी शशिकला, भूतपूर्व सैनिकों सहित दर्जनों ग्रामीणों ने सक्षम अधिकारी भूमि अवाप्ति एवं उपखंड अधिकारी झुंझुनूं को प्रार्थना पत्र सौंपकर पूर्व में जारी एकतरफा अधिग्रहण प्रक्रिया को अन्यायपूर्ण बताते हुए संशोधन की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे आगे आंदोलन की राह भी अपना सकते हैं।
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