जसरापुर में विराट हिंदू सम्मेलन: महिलाओं की भव्य कलश यात्रा, नवकुंडीय यज्ञ और संतों के ओजस्वी संबोधनों से गूंज उठा स्टेडियम
जसरापुर में विराट हिंदू सम्मेलन: महिलाओं की भव्य कलश यात्रा, नवकुंडीय यज्ञ और संतों के ओजस्वी संबोधनों से गूंज उठा स्टेडियम
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : विजेन्द्र शर्मा
खेतड़ी : जसरापुर में सर्व हिंदू समाज की ओर से रविवार को विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन शहीद भीम सिंह शौर्य चक्र राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के पंडित सच्चिदानंद जोशी स्टेडियम में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत बड़े मंदिर से हुई, जहां से महिलाओं ने गाजे-बाजे के साथ त्रिवेणी संगम की भव्य कलश यात्रा निकाली। कलश यात्रा का ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इस दौरान पुरुष हाथों में भगवा ध्वज लेकर यात्रा में शामिल हुए। कलश यात्रा पंडित सच्चिदानंद जोशी स्टेडियम स्थित सम्मेलन स्थल पर पहुंची।कलश यात्रा के उपरांत अतिथियों ने भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया।
महंत आचार्य शंभू नाथ शास्त्री पीठाधीश्वर, बागेश्वर धाम के सानिध्य में नवकुंडीय हवन-यज्ञ संपन्न हुआ, जिसमें 11 जोड़ों ने भाग लिया। इनमें मुख्य यजमान समाजसेवी झंडू राम गुर्जर एवं प्रशासक मंजू देवी रहे। इसके अलावा छगनलाल शर्मा एवं शकुंतला देवी, सुरेश सैनी एवं मंजू देवी, मनोज शर्मा एवं पारस देवी, अमित शर्मा एवं सुनीता देवी, रघुवीर योगी एवं राजबाला देवी, रामचंद्र गुर्जर एवं कृष्णा देवी, राकेश पांडे एवं अंजू देवी, विनोद फन एवं रिंकी देवी, विक्की सोनी एवं सोनिया देवी तथा सुरेंद्र तिवाड़ी एवं अंजू देवी शामिल रहे। यज्ञ के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए संत प्रखर प्रवक्ता हरिप्रिया जसरापुरिया (वृंदावन) का विशेष एवं प्रभावशाली संबोधन रहा। अपने ओजस्वी उद्बोधन में उन्होंने सनातन धर्म की महत्ता, हिंदू समाज की एकता और संस्कारों की रक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब हिंदू समाज संगठित होता है, तभी धर्म, संस्कृति और राष्ट्र मजबूत बनते हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी परंपराओं को समझने और धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।हरिप्रिया जसरापुरिया ने महिलाओं की भूमिका पर विशेष रूप से प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति, संस्कार और सृजन का केंद्र माना गया है। परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने महिलाओं से अपने संस्कारों और संस्कृति की रक्षा करने तथा आने वाली पीढ़ी को सही दिशा देने का आह्वान किया।
दादू पंथी महंत विजय दास महाराज (अस्थल मंदिर, जसरापुर) ने अपने संबोधन में धर्म, संयम और सेवा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा त्याग, सत्य और सदाचार की सीख देती है, जिसे जीवन में उतारना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने समाज में आपसी भाईचारे, सद्भाव और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश दिया तथा युवाओं से नशा, हिंसा और कुरीतियों से दूर रहने का आह्वान किया।
महंत आचार्य शंभू नाथ शास्त्री (पीठाधीश्वर, बागेश्वर धाम खरखड़ा) एवं मूलचंद ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सनातन धर्म विश्व को शांति, सद्भाव और मानवता का मार्ग दिखाता है। उन्होंने समाज को संगठित रहकर धर्म और संस्कृति की रक्षा करने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्हें उपस्थित लोगों ने सराहा। सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने पर अनेक लोगों को सम्मानित किया गया तथा सभी अतिथियों का माला एवं शाल ओढ़ाकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम के समापन पर प्रसाद वितरण किया गया।
आयोजन में शिवकुमार सुरेलिया, सुरेंद्र जांगिड़, छगनलाल शर्मा, राजेश जलंद्रा, राजेश धेदड़, भंवरलाल मारोठिया, सावत राम जांगिड़, अशोक सेन, रघुवीर योगी, निखिल शर्मा, रघुवीर धांनिया, राजकुमार निर्वाण, भवानी शर्मा, संजय सुरोलिया, अशोक गुर्जर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं और युवा उपस्थित रहे, जिससे पूरा क्षेत्र धर्ममय एवं उत्सवपूर्ण वातावरण में सराबोर नजर आया।
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