चारावास बनेगा प्लास्टिक मुक्त गांव: स्वच्छता एवं जागरूकता अभियान से जागी नई चेतना, जल्द खुलेगा स्टील बर्तन बैंक
चारावास बनेगा प्लास्टिक मुक्त गांव: स्वच्छता एवं जागरूकता अभियान से जागी नई चेतना, जल्द खुलेगा स्टील बर्तन बैंक
जनमानस शेखावाटी संवाददाता : विजेन्द्र शर्मा
खेतड़ी : खेतड़ी क्षेत्र के चारावास गांव में युवाओं और ग्रामीणों ने मिलकर गांव को प्लास्टिक मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। इसी कड़ी में रविवार को एक व्यापक स्वच्छता एवं जागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान सार्वजनिक स्थानों से प्लास्टिक कचरा एकत्र कर उसे नष्ट किया गया, जिससे गांव में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश फैला।जितेंद्र जांगिड़ और विजेंद्र बोराण के नेतृत्व में ग्रामीण बालाजी मंदिर के पास एकत्रित हुए, जहां से ‘प्लास्टिक मुक्त चारावास’ अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया। सर्वप्रथम बालाजी मंदिर परिसर की सफाई की गई। इसके बाद पंचायत भवन, मुख्य बस स्टैंड, बालिका विद्यालय और गांव के प्रमुख मार्गों पर श्रमदान किया गया।
जितेंद्र जांगिड़ ने बताया कि प्लास्टिक मुक्त चारावास बनाने के लिए 26 जनवरी को एक बैठक आयोजित की गई थी। इसमें 14 सदस्यों की एक कार्य समिति का गठन किया गया, जिसे बाद में विस्तार देकर 25 सदस्यों का कर दिया गया है। यह समिति अभियान को निरंतर आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।अभियान के तहत गांव के व्यापारियों को भी प्लास्टिक से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान के बारे में जागरूक किया गया। व्यापारियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया और प्लास्टिक के उपयोग को कम करने पर सहमति जताई।

ग्रामीणों ने यह भी निर्णय लिया है कि गांव में होने वाले विवाह और अन्य सामाजिक आयोजनों में कागज व प्लास्टिक से बने डिस्पोजेबल बर्तनों का उपयोग बंद किया जाएगा। इसके स्थान पर पुनःउपयोग योग्य स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए गांव में जल्द ही एक स्टील बर्तन बैंक की स्थापना की जाएगी।
विजेंद्र बोराण ने जानकारी दी कि श्रमदान के साथ-साथ आर्थिक सहयोग भी मिल रहा है और अब तक लगभग 1 लाख 55 हजार रुपये एकत्रित हो चुके हैं। इस राशि का उपयोग बर्तन बैंक की स्थापना और अन्य पर्यावरणीय कार्यों में किया जाएगा।इस अभियान में कामरेड इंद्राज सिंह बोराण, समाजसेवी कपिल चाहर, जितेंद्र जांगिड़, अंकित जांगिड़, देवेंद्र जांगिड़, विजेन्द्र झाझड़ीया, नरेंद्र मांठ, रामनिवास चाहर, उमंग जांगिड़, विकास चाहर, डॉ. सुनील चाहर, अनिल कल्याण, सूबेदार रविंद्र चाहर, शंकर लाल, सुनील कल्याण, सतबीर जांगिड़, अनिल चाहर, राकेश जांगिड़ सहित अनेक ग्रामीणों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
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