नेछवा नरसास में श्रीमद्भागवत कथा का छठा दिन:भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन, कंस वध की कथा सुनाई
नेछवा नरसास में श्रीमद्भागवत कथा का छठा दिन:भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन, कंस वध की कथा सुनाई
नेछवा : नेछवा नरसास गांव स्थित जीण माता मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया गया। यह आयोजन भक्त नंदू कंवर के सानिध्य में हो रहा है।
दिव्य कला कुंज अयोध्या के कथावाचक पंडित गोपाल शास्त्री डीडवाना ने संगीतमय कथा वाचन करते हुए भगवान की बाल लीलाओं के चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने श्रोताओं को लीला और क्रिया के बीच का अंतर समझाया। शास्त्री जी ने बताया कि अभिमान और सुखी रहने की इच्छा से की गई प्रक्रिया क्रिया कहलाती है, जबकि दूसरों को सुखी रखने की इच्छा को लीला कहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाओं से समस्त गोकुलवासियों को सुखी और संपन्न रखा।
शास्त्री जी ने माखन चोरी का आशय भक्तों के मन की चोरी से बताया। उन्होंने कहा कि कन्हैया ने भक्तों के मन को चुराया। उन्होंने भगवान कृष्ण के जन्म के बाद कंस द्वारा भेजी गई राक्षसी पूतना के वध की कथा भी सुनाई। पूतना ने भेष बदलकर जहरीला दूध पिलाने का प्रयास किया, लेकिन भगवान ने उसका वध कर दिया।
कथावाचक ने कार्तिक माह में भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए ब्रजवासियों द्वारा की जाने वाली पूजा का भी वर्णन किया। भगवान कृष्ण ने उन्हें इंद्र की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। इससे क्रोधित होकर भगवान इंद्र ने गोकुल को बहाने के लिए भारी वर्षा की। तब भगवान कृष्ण ने अपनी कनिष्ठ अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी ब्रजवासियों को उसके नीचे आश्रय दिया, जिससे इंद्र का घमंड टूट गया।
पंडित गोपाल शास्त्री ने मथुरा को कंस के आतंक से बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कंस वध की कथा भी सुनाई। इस अवसर पर मुख्य यजमान मनफूल सिंह नरूका, बलवीर सिहाग, विक्रम सिंह नरूका, मुकेश अलखपुरा बोगन और जगदीश मिस्त्री भंवर सिंह नरूका ने भगवान की पूजा-अर्चना की।
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