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बेटी के अधूरे सपनों को समाज की ताकत बना रहा रक्षित सेवा संस्थान


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बेटी के अधूरे सपनों को समाज की ताकत बना रहा रक्षित सेवा संस्थान

रक्षित की 19वीं जयंती पर शिक्षा और सेवा का संकल्प, प्रतिभा व भामाशाह सम्मान समारोह आयोजित

बलौदा : एक बेटी भले ही असमय चली गई हो, लेकिन उसके सपने आज भी सैकड़ों बच्चों की आंखों में जिंदा हैं। रक्षित सेवा संस्थान बलौदा द्वारा शहीद धर्मपाल राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित प्रतिभा सम्मान एवं भामाशाह सम्मान समारोह में यही भाव हर चेहरे पर नजर आया। इस अवसर पर संस्थान की प्रेरणास्रोत, हम सब की लाडली बेटी रक्षित की 19वीं जयंती भावुक लेकिन प्रेरणादायी माहौल में मनाई गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माजरी आश्रम के संत कृष्ण स्वरूप महाराज ने कहा कि बेटी रक्षित की असामयिक मृत्यु से हुई क्षति की कोई भरपाई संभव नहीं, लेकिन उसके माता-पिता द्वारा उसकी स्मृति में शिक्षा, पर्यावरण, चिकित्सा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्य वास्तव में समाज के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल के बच्चों में रक्षित के सपनों की झलक दिखाई देती है और इन्हीं सपनों को साकार करने का काम रक्षित सेवा संस्थान कर रहा है। इसके लिए उन्होंने विकास अधिकारी दारा सिंह एवं उनके परिवार की सराहना की।

समारोह में रक्षित सेवा संस्थान की ओर से विद्यालय में सरस्वती प्रतिमा भेंट करने वाले भामाशाहों सहित विद्यालय के भौतिक विकास में योगदान देने वाले दानदाताओं का सम्मान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य नेतराम यादव ने की। उन्होंने कहा कि बेटियों को शिक्षा से जोड़कर ही समाज को मजबूत और संवेदनशील बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के संदेश को केवल नारा नहीं, बल्कि जीवन का संकल्प बनाने पर जोर दिया। प्रमुख वक्ताओं में एडवोकेट हरेश पंवार, पूर्व प्राचार्य जे.पी. शर्मा उरीका, रामानंद शर्मा, ईश्वर सिंह ठोलिया, सिंघाना नायब तहसीलदार सत्यनारायण सेन, नरेश कुमार, सुरेश कुमार, मुकेश शर्मा, अनीता पूनिया, वीडीओ बलवंत सिंह कल्याण, रणवीर सिंह भावठड़ी सहित अनेक गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

कार्यक्रम का संचालन शीशराम बरसीवाल एवं भूपेंद्र सागवा ने किया। इस अवसर पर रक्षित सेवा संस्थान द्वारा वर्षभर की गई सामाजिक, शैक्षणिक और सेवा गतिविधियों की जानकारी साझा की गई। संस्थान ने प्रतिवर्ष विद्यालय में ‘बेटी अध्ययन दिवस’ आयोजित करने का संकल्प भी दोहराया।

बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी, अभिभावक और क्षेत्रवासी कार्यक्रम में मौजूद रहे। पूरे आयोजन ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि यदि इरादे मजबूत हों, तो एक बेटी की स्मृति पूरे समाज की दिशा बदल सकती है।

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