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अंबेडकर विचार मंच ने दिव्य विकास असिस्टेंट प्रोफेसर बनने पर किया सम्मान


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अंबेडकर विचार मंच ने दिव्य विकास असिस्टेंट प्रोफेसर बनने पर किया सम्मान

अंबेडकर विचार मंच ने दिव्य विकास असिस्टेंट प्रोफेसर बनने पर किया सम्मान

जनमानस शेखावाटी संवाददाता : अंसार मुज्तर

बगड़ : अंबेडकर सर्किल जाटावास में कार्यक्रम पशुपालन विभाग पूर्व निदेशक डॉक्टर जगदीश बरवड़ की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। आज के कार्यक्रम में अंबेडकर विचार मंच बगड़ की तरफ से दिव्य विकास भूगोल असिस्टेंट प्रोफेसर बनने पर कार्यक्रम आयोजित किया गया सर्वप्रथम संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित किए। उसके बाद दिव्य विकास को माला व साफा पहनाकर प्रतीक चिह्न देकर सम्मान किया गया कार्यक्रम के अंत में मिठाई वितरित की गई।

इस अवसर पर पशुपालन विभाग पूर्व निदेशक डॉक्टर जगदीश बरवड़,पशुपालन विभाग उपनिदेशक शिवरतन गहनोलिया, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सतवीर बरवड़, AEN रामप्रताप बरवड़, भीम आर्मी जिलाध्यक्ष विकास आल्हा,पूर्व व्याख्याता करणीराम बरवड़, पूर्व सरपंच बनवारी लाल गोठवाल, पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष रामलाल चंदेलिया, मुरारी लाल बरवड़, अध्यापक धर्मपाल आल्हा, रामेश्वर बरवड़, रविंद्र आल्हा, धर्मेंद्र, पार्षद शुभकरण बरवड़, श्यामलाल फुलवारिया, बनवारी लाल फुलवारिया, चुनीलाल, विजेंद्र भाटिया, चौथमल, मालीराम निर्मल, जोगेंद्र, रामावतार डांगी, मूलचंद, फतेहसिंह कड़वासरा, राजेंद्र टेलर परमेश्वरी देवी, सुनीता शारदा, बबीता आदि उपस्थित रहे।

भीम आर्मी जिलाध्यक्ष विकास आल्हा बताया कि झुंझुनूं जिले के बगड़ कस्बे से दिव्य विकास ने बड़ी सफलता हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। भूगोल असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में पहली ही कोशिश में 121वीं रैंक लाकर उन्होंने मिसाल कायम की. नौकरी, परिवार और सीमित संसाधनों के बीच बिना कोचिंग हासिल यह कामयाबी हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। मूल रूप से विकास झुंझुनूं जिले के बगड़ कस्बे से है जो शिक्षा नगरी के नाम से प्रसिद्ध है। उन्होंने बताया वह सोशल मीडिया से बिल्कुल दूर रहते थे, फोन का उपयोग भी सीमित करते है, पहले से शिक्षा विभाग से जुड़े हुए हैं। वे वर्तमान में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय लाडनूं में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं और वे पिछले कुछ वर्षों से शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

अध्यापन कार्य के साथ-साथ उन्होंने कभी अपनी पढ़ाई को पीछे नहीं छोड़ा. नौकरी की जिम्मेदारियों, और पारिवारिक दायित्वों के बावजूद उन्होंने खुद भी कभी पढ़ना नहीं छोड़ा। पढ़ाने के साथ-साथ समाज में शिक्षा के प्रति युवाओं को जागरूक करना, खुद पढ़ना और नई चीजें सीखना उनके जीवन का हिस्सा रहा है. यही वजह है कि वे धीरे-धीरे अपने लक्ष्य के करीब पहुंचते गए और आज असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का सपना साकार कर पाए। सीमित संसाधनों, स्वयं की बनाई रणनीति और कड़ी मेहनत के साथ पढ़ाई करना उनकी सफलता का कारण बना ।केवल विकास ही नहीं बल्कि उनका पूरा परिवार भी शिक्षा से जुड़ा हुआ है. उनके पिता सेवानिवृत्त व्याख्याता करणीराम बरवड़। माता जी परमेश्वरी देवी गृहणी है। इसके अलावा भाई निशांत बरवड़ डॉक्टर के पद पर कार्यरत हैं, सभी ने विकास को आगे बढ़ने और शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने की प्रेरणा दी।

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