उड़ीसा में राष्ट्रीय अधिवेशन रद्द करने के विरोध में भारत मुक्ति मोर्चा का झुंझुनूं कलेक्ट्रेट पर धरना
राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
झुंझुनूं : उड़ीसा के कटक में प्रस्तावित राष्ट्रीय अधिवेशन को अनुमति मिलने के बाद भी रद्द किए जाने के विरोध में भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम के आह्वान पर घोषित चार चरणबद्ध आंदोलन के तहत गुरुवार को झुंझुनूं जिला कलेक्ट्रेट पर एक दिवसीय शांतिपूर्ण सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया गय
धरना भारत मुक्ति मोर्चा, बहुजन क्रांति मोर्चा, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, क्षत्रीय मूलनिवासी महासंघ एवं राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का नेतृत्व ओमप्रकाश सेवदा, जिलाध्यक्ष एवं प्रदेश महासचिव (बीएमएम) ने किया। प्रदर्शन के पश्चात राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर अरुण गर्ग को ज्ञापन सौंपा गया।
ओमप्रकाश सेवदा ने कहा कि उड़ीसा सरकार द्वारा बामसेफ एवं भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन की अनुमति निरस्त करना लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय आरएसएस–बीजेपी के दबाव में लिया गया है। इसी के विरोध में देशभर के 725 जिलों में एक साथ धरना-प्रदर्शन कर आवाज उठाई जा रही है।
ज्ञापन में प्रमुख मांगों में:
- उड़ीसा सरकार द्वारा निरस्त की गई राष्ट्रीय अधिवेशन की अनुमति तत्काल प्रभाव से बहाल की जाए।
- अधिवेशन रद्द होने से संगठन एवं प्रतिनिधियों को हुए खर्च और नुकसान का पूर्ण मुआवजा दिया जाए।
- भविष्य में किसी भी संवैधानिक, सामाजिक एवं वैचारिक कार्यक्रम को राजनीतिक दबाव में रोकने की परंपरा समाप्त की जाए।
- संविधान प्रदत्त लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा हेतु स्वतंत्र कानून बनाया जाए।
- ओबीसी जाति आधारित जनगणना को दबाने की साजिश की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए।
- संविधान के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अनुच्छेद 356 के तहत संवैधानिक तंत्र की रक्षा हेतु उचित कार्रवाई की जाए।
धरने को चौथमल सोकरिया, रामसिंह जोधा, एडवोकेट धर्मपाल बंसीवाल, रतनलाल तंवर, कैप्टन सोहनलाल (आरक्षण अधिकार मंच) एवं आयुष्मति किरण सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने संविधान की पालना सुनिश्चित करने और देश में अमन-शांति बनाए रखने की अपील की।
धरना प्रदर्शन में राधेश्याम चिरानिया, शेर सिंह महरमपुर, प्रभुदयाल जागृत, प्रेमलता, सुरेश, बबीता, सुभाषचंद्र, गोकुलचंद्र, ओमप्रकाश, संजू, बनारसी देवी, सरिता, ममता सिंह, रेहान मूलनिवासी, अंजू, मंजू, दिलीप सिंह, हरलाल सिंह बड़वासी, गोविंद राम कल्याण, बीरबल सिंह, ममता गर्वा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं नागरिक मौजूद रहे।
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