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संघर्ष से साधना तकः लोकभक्ति संगीत के उभरते हस्ताक्षर – लीलाधर ‘शिवम्’ प्रजापत


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संघर्ष से साधना तकः लोकभक्ति संगीत के उभरते हस्ताक्षर – लीलाधर ‘शिवम्’ प्रजापत

संघर्ष से साधना तकः लोकभक्ति संगीत के उभरते हस्ताक्षर – लीलाधर 'शिवम्' प्रजापत

जनमानस शेखावाटी संवाददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : ज़िले की माटी से निकले लोकभक्ति संगीत के सशक्त हस्ताक्षर लीलाधर (शिवम् प्रजापत) आज अपनी लेखनी और स्वर से राजस्थान की धार्मिक-लोक परंपरा को नई पहचान दे रहे हैं। एक मध्यम परिवार में जन्मे शिवम् प्रजापत ने अभावों के बीच जो संघर्ष किया, वही आज उनकी रचनाओं की आत्मा बन चुका है। तीन भाइयों में मझले भाई शिवम् प्रजापत ने कम उम्र से ही जीवन की कठिनाइयों को नज़दीक से देखा। संसाधन सीमित थे, लेकिन भक्ति, संस्कार और संगीत के प्रति समर्पण असीम। इसी लगन ने उन्हें लोकदेवताओं और भक्ति संगीत की दुनिया तक पहुँचाया।लोकभक्ति संगीत में पहचान शिवम् प्रजापत की लेखनी ने चेतक कम्पनी जैसे प्रतिष्ठित मंच तक अपनी जगह बनाई। वहाँ उनके लिखे गए चर्चित गीतों में शामिल हैं-ताऊ छिलका जिस घर में कीर्तन राम को, बाबो आवे दौड़ो बनसा हींडो घलादो सा जगदेव कंकाली का भाग – 3 एवं अन्य।

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