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आबकारी नीति पर शराब कारोबारियों की चिंता:10% बढ़त पर आपत्ति, झुंझुनूं लिकर एसोसिएशन ने उठाई मांग


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आबकारी नीति पर शराब कारोबारियों की चिंता:10% बढ़त पर आपत्ति, झुंझुनूं लिकर एसोसिएशन ने उठाई मांग

आबकारी नीति पर शराब कारोबारियों की चिंता:10% बढ़त पर आपत्ति, झुंझुनूं लिकर एसोसिएशन ने उठाई मांग

जनमानस शेखावाटी संवाददाता : चंद्रकांत बंका

झुंझुनूं : झुंझुनूं राजस्थान की आगामी आबकारी नीति 2025-29 को लेकर प्रदेशभर के शराब कारोबारियों में हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में लिकर कॉन्ट्रैक्टर्स (W) एसोसिएशन, झुंझुनूं ने जिला आबकारी अधिकारी के माध्यम से शासन सचिव और आबकारी आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें मौजूदा नीति में व्यावहारिक सुधार करने और ठेकेदारों को आ रही तकनीकी व प्रशासनिक समस्याओं के समाधान की मांग की गई है।

एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकार राजस्व बढ़ाना चाहती है, तो उसे जमीनी हकीकत के अनुसार नीति में बदलाव करने होंगे। मौजूदा प्रावधानों से न केवल कारोबार प्रभावित हो रहा है, बल्कि अवैध शराब की गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है।

रात 11 बजे तक खुलें शराब की दुकानें

ज्ञापन में प्रमुख मांग उठाई गई है कि आगामी नीति में मदिरा दुकानों का संचालन समय सुबह 10 बजे से बढ़ाकर रात 11 बजे तक किया जाए। एसोसिएशन ने तर्क दिया कि हरियाणा और पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्यों में दुकानें देर रात तक खुलती हैं, जबकि राजस्थान में समय से पहले बंद होने के कारण अवैध शराब की बिक्री और तस्करी बढ़ जाती है। समय बढ़ाने से जहां अवैध कारोबार पर अंकुश लगेगा, वहीं सरकारी राजस्व में भी वृद्धि होगी।

सर्वर डाउन की सजा ठेकेदार क्यों भुगतें?

ठेकेदारों ने बताया कि विभाग की SSO ID और सर्वर बार-बार डाउन रहने से वे समय पर आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी नहीं कर पाए। इसके बावजूद उन पर भारी पेनल्टी लगा दी गई। एसोसिएशन ने मांग की कि विभाग अपनी तकनीकी खामियों की जिम्मेदारी ले और ठेकेदारों पर लगी पेनल्टी तुरंत माफ की जाए। साथ ही, सितंबर में राशि जमा कराने वाले अनुज्ञाधारियों को बिना किसी अतिरिक्त दंड के मदिरा उठाव का अवसर दिया जाए।

10% वार्षिक वृद्धि अव्यावहारिक, 5% की मांग

आगामी नीति के बिंदु संख्या 2.8.3 के तहत प्रस्तावित 10% वार्षिक वृद्धि (बढ़त) का कड़ा विरोध किया गया है। एसोसिएशन का कहना है कि किसी भी सेक्टर में लगातार 10% की बढ़त व्यावहारिक नहीं है। इससे चार वर्षों तक दुकानों का नवीनीकरण (Renewal) कराना लगभग असंभव हो जाएगा। कारोबारियों ने सुझाव दिया है कि वार्षिक वृद्धि दर को 5% किया जाए, ताकि समय पर राजस्व भी मिले और क्लस्टर का नवीनीकरण भी सुगमता से हो सके।

अन्य प्रमुख मांगें भी रखीं

ज्ञापन में शराब कारोबार को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए अन्य अहम सुझाव भी दिए गए।

  • वार्षिक मदिरा उठाव की गारंटी को त्रैमासिक (Quarterly) आधार पर तय किया जाए।
  • ए.एल.एफ. (Annual License Fee) के माल को भी गारंटी कोटे में शामिल किया जाए।
  • मध्य संयम नीति के तहत लगाई जाने वाली पेनल्टी किसी भी स्थिति में ठेकेदार के प्रॉफिट मार्जिन से अधिक न हो।

सरकार से जल्द निर्णय की उम्मीद

एसोसिएशन ने उम्मीद जताई कि सरकार ठेकेदारों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए आगामी आबकारी नीति में आवश्यक संशोधन करेगी। उनका कहना है कि व्यावहारिक नीति से ही राजस्व बढ़ेगा, अवैध शराब पर लगाम लगेगी और कारोबार सुचारु रूप से चल सकेगा।

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