“अरावली बचाओ–मनरेगा बचाओ” : कांग्रेस ने सीकर में सरकार के खिलाफ निकाली रैली, जमकर किया विरोध प्रदर्शन
“अरावली बचाओ–मनरेगा बचाओ” : कांग्रेस ने सीकर में सरकार के खिलाफ निकाली रैली, जमकर किया विरोध प्रदर्शन
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : नैना शेखावत
सीकर : राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर शुक्रवार को सीकर जिला मुख्यालय पर कांग्रेस की ओर से अरावली पर्वतमाला को बचाने और मनरेगा के नाम परिवर्तन के विरोध में विशाल रैली निकालकर राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। रैली का नेतृत्व सीकर विधायक राजेंद्र पारीक, फतेहपुर विधायक हाकम अली खां, निवर्तमान सभापति जीवण खां एवं कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुनीता गठाला ने किया।
प्रदर्शन से पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर को पुष्पांजलि अर्पित की तथा बांग्लादेश में मारे गए हिंदू नागरिकों और छात्रों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता “अरावली बचाओ–प्रदेश बचाओ” के नारे लगाते हुए बजरंग कांटा और सिल्वर जुबली रोड होते हुए कल्याण सर्किल पहुंचे, जहां सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।

अरावली हमारी जीवन रेखा : राजेंद्र पारीक
सीकर विधायक राजेंद्र पारीक ने कहा कि अरावली पर्वतमाला सिर्फ पहाड़ नहीं, बल्कि हमारी जीवन रेखा है। उन्होंने कहा कि अरावली जलवायु संतुलन बनाए रखने, वर्षा जल संरक्षण, हरियाली और मरुस्थल के विस्तार को रोकने में अहम भूमिका निभाती है। यदि यहां खनन हुआ तो राजस्थान में मरुस्थलीकरण तेजी से बढ़ेगा और जलवायु पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।
भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप
कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुनीता गठाला ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सत्ता में आने के बाद सार्वजनिक संसाधनों के निजीकरण और पर्यावरण विनाश की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि एक ओर “एक पेड़ मां के नाम” का प्रचार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर हजारों पेड़ों की कटाई की जा रही है। अरावली में खनन से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर गहरा संकट खड़ा हो जाएगा।
उन्होंने मांग की कि सरकार यदि वास्तव में अरावली को बचाना चाहती है तो सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पहल करे और खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए।
सैकड़ों कार्यकर्ता रहे मौजूद
प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और आम नागरिक मौजूद रहे। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि अरावली और मनरेगा से जुड़े फैसलों पर सरकार ने पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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