बामसेफ द्वारा ईवी रामास्वामी पेरियार की 52 वीं पुण्यतिथि सूरजगढ़ में मनाई गई
बामसेफ द्वारा ईवी रामास्वामी पेरियार की 52 वीं पुण्यतिथि सूरजगढ़ में मनाई गई
सूरजगढ़ : अंधविश्वास और पाखंडवाद के धुर विरोधी ईवी रामासामी पेरियार ने के चित्र पर पुष्प अर्पित एवं मोबमत्ती जलाकर उनका 52 वां महापरिनिर्वाण दिवस बामसेफ,भारत मुक्ति मोर्चा तथा अंबेडकर समिति के संयुक्त तत्वावधान में मनाया गया।
ईवी रामासामी पेरियार तमिलनाडु के एक महान समाज सुधारक और राजनीतिज्ञ थे जिन्होंने जाति व्यवस्था व वर्चस्ववाद और धार्मिक पाखंड के खिलाफ आत्म सम्मान आंदोलन चलाया। लैंगिक समानता, तर्कवाद और दलितों के उत्थान के लिए उन्होंने जीवन भर संघर्ष किया जिससे द्रविड़ आंदोलन को नई दिशा मिली और उन्हें पेरियार की उपाधि मिली। तमिलनाडु में सामाजिक न्याय दिवस के रूप में पेरियार जयंती मनाते हैं। पेरियार का जन्म 17 सितंबर 1879 को इरोड मद्रास प्रेसीडेंसी तमिलनाडु में हुआ तथा उनका महापरिनिर्वाण 24 दिसंबर 1973 को बेलेरे में हुआ।
पेरियार का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा एक समृद्ध व्यापारी परिवार में हुई। उन्होंने पारंपरिक शिक्षा प्राप्त की लेकिन काशी वाराणसी की यात्रा के दौरान उन्हें जातिगत भेदभाव का अनुभव हुआ जिससे वह नास्तिक बन गए और हिंदू धर्म के प्रति उनका दृष्टिकोण बदल गया। 1919 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और यकम सत्याग्रह केरल में मंदिर प्रवेश आंदोलन में भाग लिया। कांग्रेस से मोह भंग होने पर 1925 में कांग्रेस छोड़ दी क्योंकि उन्हें लगा कि यह केवल अवैज्ञानिक और सत्य से परे की बातें कर देश की जनता को गुमराह कर रहे है जिससे आमजनता में पाखंड,रूढ़िवाद और अंधविश्वास बढ़ रहा है और यह राजनीतिक वर्ग केवल खुद के हितों की पूर्ति कर रहा है। यह विचार शिक्षाविद मोतीलाल डिग्रवाल ने रखे।
राधेश्याम चिरानिया, सुरेंद्र मेहरा,छोटेलाल गजरा, गोपीराम सोकरिया,महावीर प्रसाद बाकोलिया,रतनलाल चेतीवाल,ओमप्रकाश सेवदा सहित कई लोगों ने पेरियार के महापरिनिर्वाण दिवस कार्यक्रम में भाग लिया।
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