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झुंझुनूं में माटी कला कारीगरों को मिला सहारा:श्रीयादे माटी कला बोर्ड ने बांटे चाक और मशीनें, 66 को निशुल्क मिले


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झुंझुनूं में माटी कला कारीगरों को मिला सहारा:श्रीयादे माटी कला बोर्ड ने बांटे चाक और मशीनें, 66 को निशुल्क मिले

झुंझुनूं में माटी कला कारीगरों को मिला सहारा:श्रीयादे माटी कला बोर्ड ने बांटे चाक और मशीनें, 66 को निशुल्क मिले

जनमानस शेखावाटी संवाददाता : चंद्रकांत बंका

झुंझुनूं : श्रीयादे माटी कला बोर्ड द्वारा झुंझुनूं जिले के प्रशिक्षित कारीगरों को विद्युत चलित चाक (इलेक्ट्रिक व्हील) और मिट्टी गूंथने की मशीनें निशुल्क वितरित की गईं। यह पहल कारीगरों की आय बढ़ाने उनके काम को आसान बनाने और उन्हें आधुनिक तकनीक से सशक्त बनाने के लिए की गई है।

बोर्ड के अध्यक्ष प्रहलाद राय टांक ने झुंझुनूं जिले का दौरा किया और जिले की सातों विधानसभा क्षेत्रों के 66 प्रशिक्षित कारीगरों को इन महत्वपूर्ण उपकरणों का वितरण किया। वितरण कार्यक्रम का आयोजन रोड नंबर 3 स्थित मोरवाल भवन में किया गया, जहां बड़ी संख्या में माटी कला से जुड़े दस्तकार उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री की बजट घोषणा

बोर्ड अध्यक्ष प्रहलाद राय टांक ने इस अवसर पर कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बजट घोषणा के अनुरूप प्रदेश भर में हजारों कारीगरों को ये आधुनिक मशीनें प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस योजना का मुख्य लक्ष्य माटी कला से जुड़े दस्तकारों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना और इस पारंपरिक कला का संरक्षण करना है।

उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में होगी वृद्धि

उपकरण प्राप्त करने वाले कारीगरों ने बोर्ड अध्यक्ष का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने साझा किया कि इन मशीनों से उनका शारीरिक श्रम कम होगा और काम करना अधिक आसान हो जाएगा। कारीगरों ने विश्वास जताया कि ये उपकरण उनकी उत्पादन क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि करेंगे, जिससे उनकी आय में भी इज़ाफ़ा होगा।

बोर्ड अध्यक्ष टांक ने कारीगरों से अपील की कि वे इन मशीनों का सदुपयोग करें और उच्च गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बनाकर बाज़ार में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाएं। यह कदम न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधारेगा, बल्कि माटी कला को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में सहायक होगा। श्रीयादे माटी कला बोर्ड अध्यक्ष ने प्रहलाद राय टांक ने कहा कि इन मशीनों से माटी कला से जुड़े दस्तकारों को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे और हमारी पारंपरिक कला का संरक्षण होगा।

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