खाचरियावास को पंचायत समिति बनाने पर उग्र विरोध
बाय समेत 17 ग्राम पंचायतों में उबाल, लक्ष्मीनाथ मंदिर के सामने अनिश्चितकालीन धरना
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : नैना शेखावत
दांतारामगढ़ : दांतारामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में पंचायत समिति के पुनर्गठन को लेकर बाय गांव में आक्रोश चरम पर पहुंच गया। राज्य सरकार द्वारा बाय के स्थान पर खाचरियावास को पंचायत समिति बनाने की घोषणा के बाद ग्रामीण सड़क पर उतर आए। बाय के श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर के सामने बड़ा अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया गया है, जिसमें 17 पंचायतों के लोग शामिल हो रहे हैं।
“बाय हर मानदंड पर खरा, फिर भी अधिकार छीना गया”
ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने कहा कि : बाय तहसील दांतारामगढ़ की सबसे बड़ी और विकसित पंचायतों में शामिल है, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, सड़क जुड़ाव सहित सभी मामलों में अग्रणी, 2011 की जनगणना में जनसंख्या, साक्षरता, लिंगानुपात में अव्वल, इसके बावजूद सरकार ने बाय की अनदेखी की है।
परिसीमन पर सवाल : नजदीकी गांव दांतारामगढ़, दूर के गांव खाचरियावास में शामिल
ग्रामीणों का तर्क है: ग्राम पंचायत कुली दांतारामगढ़ से मात्र 100 मीटर दूर है, फिर भी उसे दांतारामगढ़ में रखा, वहीं रेटा, सामेर, गनोड़ा, लाडपुर जैसे 30–40 किमी दूर गांवों को खाचरियावास में जोड़ दिया, खाचरियावास विधानसभा का अंतिम छोर, सीधा यातायात भी नहीं है।

“सरकार ने क्षेत्र के साथ अन्याय किया है” – ग्रामीण
क्षेत्र के नेताओं का कहना है कि, “खाटूश्यामजी मास्टर प्लान और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए बाय का चयन होना तय था।
लेकिन अंतिम चरण में राजनीतिक दबाव में खाचरियावास को बढ़ाया गया।”
धरना जारी, आंदोलन और उग्र करने की चेतावनी
ग्रामीणों ने ऐलान किया “जब तक बाय को पंचायत समिति का दर्जा नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा।”
सोशल मीडिया पर भी “बाय को पंचायत समिति बनाओ” अभियान तेज हो गया है। इधर, सरकार व डीएलबी की ओर से खाचरियावास को पंचायत समिति घोषित करने का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद प्रदेश में पंचायत समितियों की संख्या अब बढ़कर 451 हो गई है।
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