सरकारी नीतियों के विरोध में क्रेशर एंड माईंस संचालकों का विरोध प्रदर्शन, अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान
एसडीएम को ज्ञापन देकर की खनन निती वापस लेने की मांग, मांग पुरी नही होने तक क्रेशर संचालकों ने अनिश्चित कालीन हड़ताल की
संपादक : डॉ आजाद अहमद खान
खेतड़ी नगर : खनन व्यवसाय में राज्य सरकार द्वारा लागू की जा रही खनन निती को लेकर खेतड़ी क्रेशर एंड माइंस एसोसिएशन के तत्वाधान में क्रेशर संचालकों ने मनोज घुमरिया के नेतृत्व में सोमवार को उपखंड कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया। क्रेशर संचालकों ने दस सुत्री मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौपा जिसमें नई खनन निती वापस लेने की मांग की, मांग पुरी नही होने तक अनिश्चित कालीन हड़ताल करने का निर्णय लिया। मनोज घुमरिया ने बताया कि मुख्यमंत्री के नाम दस सुत्री मांग पत्र एसडीएम मुकेश चौधरी को सौपा गया है।
ज्ञापन के मार्फत अवगत करवाया गया की सरकार द्वारा माईनर मिनरल एक हैक्टेयर तक के छोटे खनन पट्टों में ड्रोन तकनीक से वॉल्यूमैटिंक सर्वे करवाया जाना है। सरकार द्वारा करवाए जा रहे सर्वे से खनन कारोबारियों में अविश्वास व भय का माहौल बन रहा है। उन्होंने बताया कि छोटे खनन पट्टाधारियों को लगता है कि ड्रोन सर्वे का उदेश्य सरकार द्वारा आवंटित क्षेत्र में पूर्व में किए गए खनन का असेस्टमेंट करना तथा इसके आधार पर सरकार द्वारा बड़ी पैनलटी लगाकर राजस्व वसूल किया जाएगा। इस सर्वे के आधार पर हर खनन पट्टे में पिट की माप और मात्रा का पूर्ण रूप से मिलान भी नहीं हो पाएगा। ड्रोन सर्वे से पूर्व में किए गए खनन का मिलान ड्रोन सर्वे की रिर्पोट के आधार पर नही करने, खनिज सामग्री को रॉयल्टी छूट दिलवायी जाने का नियम में प्रावधान करवाने, रॉयल्टी पैड खनिज को एआई के माध्यम से तकनीकी कर्मियों के कारण बनाए जा रहे पंचनामों पर रोक लगाने
राजस्थान के द्वारा निर्गम खनिज पर हरियाणा सरकार 80 रूपए प्रति टन शुल्क वसूल किया जा रहा है, जिससे खनन का कारोबार प्रभावित हो रहा है। खेतड़ी खनन क्षेत्र हरियाणा सीमा से सटा हुआ है, यहां से ज्यादातर माल की खपत हरियाणा, दिल्ली, यूपी में होती है। हरियाणा सरकार द्वारा शुल्क लगाने से रोजगार प्रभावित होने व राज्य सरकार को राजस्व नुकसान भी हो रहा है। एक हैक्टेयर या उससे कम खनन क्षेत्र में धर्मकांटा लगाना संभव नहीं होने पर परिवहन विभाग द्वारा आनलाइन चालान किए जा रहे हैं तथा चालान नहीं जमा करवाने पर गाड़ियों की आरसी निरस्त की जा रही है।
प्रमुख मांगें: इस दौरान खनन कारोबारियों ने ड्रोन सर्वे बंद करवाने, खनन पट्टा से वन सीमा की दूरी 25 मीटर करने, खनन पट्टों के आवागमन के लिए रास्ते उपलब्ध करवाने, 25 प्रतिशत रायल्टी वृद्धि को कम करवाने, पूरे प्रदेश में रायल्टी राशि एक ही दर करने, ज्ञापन के मार्फत बताया कि राजस्थान के अलवर, भरतपुर, जयुपर, सीकर एवं झुंझुनूं जिलों से निर्गमित होने वाले खनिज चेजा पत्थर पर शेष राजस्थान से दस रूपए प्रतिटन ज्यादा रॉयल्टी विभाग द्वारा वसूली जा रही है। जबकी उक्त जिलों के खनन व्यापारियों को पडौसी राज्यों के खनन व्यापारियों से प्रतियोगी दरों पर माल बेचना पड़ रहा है। उपरोक्त जिलों में रॉयल्टी की दरे शेष राज्यों से कम करने, वर्तमान में जीएसटी पर आरसीएम 18 प्रतिशत है उसे पांच प्रतिशत करने की मांग की गई। ज्ञापन के मार्फत बताया कि व्यवसायी बेचे गए माल पर पांच प्रतिशत जीएसटी की वसूली कर्ता है और खरीदे गए सामान पर करीब 18 व 28 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान कर्ता है। जिससे व्यापारियों की सारी बचत जीएसटी में जमा हो जाती है। जिससे लगातार व्यापार में नुकसान उठाना पड़ रहा है। ज्ञापन के मार्फत बताया कि हाल ही में जोधपुर जीएसटी विभाग द्वारा इस विषय पर कार्यवाही कर लगभग 1500 फर्मो के बैंक खाते अटैच किए गए जो आरसीएम का उदाहरण है। उन्होंने बताया कि यदि सरकार ने खनन निती में बदलाव नहीं किया गया तो खनन कारोबारियों की हड़ताल अनिश्चितकालीन तक जारी रहेगी साथ ही चक्का जाम कर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ये रहे मौजूद :
इस मौके पर अशोक वर्मा, सुमित जाखड़, वीरेंद्र सिंह, विनोद कुमार, पवन गुर्जर, रामेश्वर, रमेश गराटी, निरंजन सैनी, होशियार सिंह, श्योपाल, धनाराम, रहीम खान, सोहार्द मीणा, अशोक मीणा, दीपक शर्मा, मानसिंह मान, मदन शर्मा, श्रीराम कुमावत, सुशील कुमार, मनिष घुमरिया, विजय कुमार, मनीष घुमरिया, सुनील अग्रवाल, संजय अग्रवाल, संजय धारीवाल, महेश गोरीर, महेश शर्मा, भूपेन्द्र सिंह, राजेश खटाणा, पवन मिल, सुखदेव सिंह, सतवीर खटाणा, रमेश गराटी, बलवीर छापोला, रहीम खान और विजय कुमार सहित समस्त क्रेशर मालिक, मजदूर, ट्रक ड्राइवर मौजूद थे।
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