मोतीलाल कॉलेज को निजी हाथों में जाने से बचाने के लिए एकजुट हुए नागरिक
पूर्व छात्रों और प्रबुद्धजनों ने बनाया ‘मोतीलाल कॉलेज बचाओ एवं बढ़ाओ संगठन’, ट्रस्टियों को पत्र भेजकर जमीन के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग
झुंझुनूं : शहर के ऐतिहासिक सेठ मोतीलाल पीजी कॉलेज को निजी या व्यावसायिक हितों के लिए इस्तेमाल होने से बचाने के लिए पूर्व छात्र और प्रबुद्ध नागरिक एकजुट हो गए हैं। कॉलेज की शैक्षणिक विरासत और संस्थान की संपत्ति की रक्षा के उद्देश्य से ‘मोतीलाल कॉलेज बचाओ एवं बढ़ाओ संगठन’ का गठन किया गया है। संगठन की ओर से सेठ झूंथालाल एजुकेशन सोसायटी और सेठ मोतीलाल तुलस्यान चैरिटी ट्रस्ट के ट्रस्टी संजीव झुंझुनूंवाला को पत्र भेजकर कॉलेज की जमीन और संसाधनों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।
पत्र में बताया गया है कि ग्रामीण और आम तबके के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सेठ मोतीलाल झुंझुनूंवाला ने वर्ष 1937 में इस संस्थान की स्थापना की थी। समय के साथ यह कॉलेज झुंझुनूं की शैक्षणिक और बौद्धिक पहचान बन गया। वर्तमान में संस्थान के पास करीब 9.66 हेक्टेयर भूमि है। इस परिसर में मुख्य कॉलेज भवन के साथ विज्ञान संकाय भवन, खेल मैदान, इनडोर स्टेडियम, विधि महाविद्यालय और बीएड कॉलेज जैसे संस्थान संचालित हैं।
संगठन ने पत्र में मांग की है कि कॉलेज की शैक्षणिक भूमि या खेल मैदान के किसी भी हिस्से को व्यावसायिक लाभ के लिए बेचने, हस्तांतरित करने अथवा किसी प्रकार का समझौता करने के प्रयासों पर तत्काल रोक लगाई जाए। नागरिकों का कहना है कि संस्थान की स्थापना जिस शैक्षणिक उद्देश्य से की गई थी, उसकी मूल भावना और सार्वजनिक हित को सुरक्षित रखा जाना जरूरी है।
पत्र भेजने वालों में पवन खेतान, परमेश्वर हलवाई, श्रीकांत सारस्वत, रामनिरंजन पुरोहित, सचिन वर्मा, नरेंद्र सैनी, इब्राहिम खान, अखिल पुरोहित, अजय वर्मा, सत्यनारायण सैनी, मनीष बगड़िया, विवेक सिंह, राजेंद्र सिंह, हरिराम कुमावत, बंटी सैनी और संदीप शर्मा सहित 50 से अधिक नागरिक शामिल हैं।
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