महफिल-ए-कव्वाली में रातभर झूमे जायरीन, अमन-चैन की मांगी दुआ
हजरत अंतरशाह दुर्वेश कलंदरी का 27वां दो दिवसीय उर्स संपन्न, देश के कई राज्यों से पहुंचे जायरीन
बिसाऊ : हजरत अंतरशाह दुर्वेश कलंदरी का सालाना 27वां दो दिवसीय उर्स बुधवार देर रात महफिल-ए-कव्वाली के साथ संपन्न हुआ। उर्स के समापन अवसर पर आयोजित कव्वाली कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जायरीन शामिल हुए। कव्वालों की प्रस्तुतियों पर देर रात तक महफिल सजी रही।
हाजी पीर निसार अहमद कलंदरी ने बताया कि उर्स का आगाज मंगलवार को जोहर की नमाज के बाद झंडे की रस्म के साथ हुआ था। 28 अक्टूबर की देर रात महफिल-ए-कव्वाली के साथ उर्स का समापन हुआ। कार्यक्रम में कर्नाटक के बेलगांव से आए कव्वाल आतिश मुराद और चिड़ावा के इदरीश कलंदरी ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। आतिश मुराद ने ‘तेरे दर का मैं फकीर’ कलाम से कव्वाली की शुरुआत की। इसके बाद रातभर कव्वालियों का सिलसिला चलता रहा।
कव्वाली सुनने के लिए बिसाऊ के अलावा आसपास के गांवों और प्रवासी परिवारों से भी लोग पहुंचे। उर्स में महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों से जायरीन शामिल हुए।
उर्स के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द की खूबसूरत मिसाल देखने को मिली। बिसाऊ धड़ीनाथ आश्रम के महंत भक्तिनाथ भी कव्वाली की महफिल में मौजूद रहे। हिंदू-मुस्लिम समाज के सैकड़ों लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत की और बिसाऊ सहित पूरे देश में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली के लिए दुआ मांगी।
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