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इतिहास से हौसला, तकनीक से चुनौती और लोककला से पहचान का संदेश


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इतिहास से हौसला, तकनीक से चुनौती और लोककला से पहचान का संदेश

शेखावाटी साहित्य संगम के दूसरे दिन गुरु तेग बहादुर के बलिदान, युवा शक्ति और डिजिटल दौर पर मंथन; लोककला प्रतियोगिताओं में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया भाग

सीकर : शेखावाटी साहित्य संगम के दूसरे दिन शनिवार को इतिहास, तकनीक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने गुरु तेग बहादुर के बलिदान की प्रासंगिकता, विकसित भारत में युवाओं की भूमिका, डिजिटल माध्यमों के प्रभाव और शेखावाटी की लोककला के संरक्षण पर विचार रखे। वहीं, लोककला प्रतियोगिताओं और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से सामाजिक समरसता, शौर्य और स्वाभिमान का संदेश दिया गया।

सालासर रोड स्थित गोविंदम रिसॉर्ट में श्री केशव संस्कृति प्रन्यास और पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगम के सत्र ‘जेन-जी, तकनीक और एल्गोरिद्म : विकसित भारत में भूमिका’ में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सामाजिक माध्यमों और डिजिटल तकनीक के बीच वर्ष 2047 तक भारत के विकास में युवा पीढ़ी की भूमिका पर चर्चा हुई।

हल्दीघाटी का इतिहास साहस की प्रेरणा : प्रो. राठौड़

‘हल्दीघाटी से वैश्विक चुनौती तक : आज का भारत’ सत्र में महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय, भरतपुर के कुलगुरु प्रो. मदन सिंह राठौड़ ने कहा कि इतिहास विपरीत परिस्थितियों में साहस और आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है। उन्होंने हल्दीघाटी के संघर्ष का उल्लेख करते हुए नेतृत्व क्षमता और दूरगामी रणनीति के महत्त्व पर प्रकाश डाला। सत्र का संचालन डॉ. हेमंत कुमार ने किया।

गुरु तेग बहादुर के बलिदान की प्रासंगिकता पर चर्चा

‘हिंद की चादर : गुरु तेग बहादुर जी और वर्तमान प्रासंगिकता’ विषयक सत्र में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के कुलपति प्रो. डॉ. करमजीत सिंह मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने गुरु तेग बहादुर के जीवन, बलिदान और शिक्षाओं के वर्तमान समय में महत्त्व पर विचार रखे। सत्र का संचालन डॉ. बरखा ने किया।

हवेलियां शेखावाटी की सांस्कृतिक धरोहर

‘लोकमंथन एवं लोकवस्तु’ सत्र में सुरेश कुमार नायक, सोनिया शर्मा और अतुल सैनी ने शेखावाटी की हवेलियों, भित्तिचित्र कला और पारंपरिक स्थापत्य के संरक्षण की जरूरत बताई। वक्ताओं ने प्राकृतिक रंगों और प्राचीन चित्रकला तकनीकों को सहेजने पर जोर दिया। संचालन डॉ. सुनिधि मिश्रा ने किया।

सफलता का कोई छोटा रास्ता नहीं : राहुल सिंह

‘रील, रियलिटी और सिनेमा’ सत्र में अभिनेता राहुल सिंह ने कहा कि सिनेमा युवाओं की सोच को प्रभावित करता है, लेकिन वास्तविक जीवन में सफलता के लिए पढ़ाई और मेहनत जरूरी है। फिल्म लेखक सूर्यपाल ने युवाओं से आभासी दुनिया के आकर्षण के बीच अपने वास्तविक लक्ष्यों और जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। सत्र का संचालन अभिमन्यु सिंह राठौड़ ने किया।

लोककला प्रतियोगिताओं में दिखी राजस्थान की संस्कृति

एकल लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिताओं में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रस्तुतियों में राजस्थान की लोकसंस्कृति के विविध रंग देखने को मिले।

रात्रिकालीन सत्र में जयपुर के युवतरंग संस्कृत नाट्य दल ने संत शिरोमणि गुरु रविदास के जीवन पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया। इसमें श्रम की गरिमा, भक्ति और सामाजिक समानता का संदेश दिया गया। दीपक भारद्वाज के लेखन एवं निर्देशन में प्रस्तुत नाटक में अर्जुन देव, संदीप कुमार शर्मा, भारत भारद्वाज, तुषार शर्मा और योगिता वेदी सहित कलाकारों ने अभिनय किया।

दल की दूसरी प्रस्तुति ‘वीरांगना हीरा दे’ में जालौर की लोकप्रचलित शौर्यगाथा के माध्यम से कर्तव्य, साहस और स्वाभिमान को मंच पर दर्शाया गया। नाटक का लेखन डॉ. राकेश कुमार जैन और दीपक भारद्वाज ने किया, जबकि निर्देशन दीपक भारद्वाज का रहा।

पुस्तक मेले में साहित्य और इतिहास की पुस्तकों में रुचि

संगम परिसर में आयोजित पुस्तक मेले में साहित्य, इतिहास, भारतीय संस्कृति और समकालीन विषयों से जुड़ी पुस्तकों का प्रदर्शन किया गया। विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों ने पुस्तकों का अवलोकन किया तथा खरीदारी भी की।

रविवार को होंगे विशेष सत्र

संगम के तीसरे दिन रविवार, 11 अक्टूबर को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ व्याख्यान देंगे। वहीं, इतिहास वक्ता राजवीर सिंह चलकोई ऐतिहासिक वीरों की पृष्ठभूमि और राजस्थान की वीर परंपरा से जुड़े प्रसंगों पर विशेष सत्र को संबोधित करेंगे।

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