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टीचर्स ने की स्थायी तबादला नीति बनाने की मांग:बोले-गैर शैक्षणिक कामों से मुक्त करें; 15 प्रस्तावों पर किया मंथन


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टीचर्स ने की स्थायी तबादला नीति बनाने की मांग:बोले-गैर शैक्षणिक कामों से मुक्त करें; 15 प्रस्तावों पर किया मंथन

टीचर्स ने की स्थायी तबादला नीति बनाने की मांग:बोले-गैर शैक्षणिक कामों से मुक्त करें; 15 प्रस्तावों पर किया मंथन

झुंझुनू : राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) जिला शाखा झुंझुनू की ओर से आयोजित जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन के दूसरे दिन खुले अधिवेशन में शिक्षकों और सार्वजनिक शिक्षा के सामने मौजूद विभिन्न चुनौतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर शिक्षकों ने अपने सुझाव एवं प्रस्ताव रखे।

खुले अधिवेशन की अध्यक्षता संगठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामावतार जांगिड़ ने की।

मुख्य अतिथि राजेंद्र दड़िया, एसीबीओ नवलगढ़ रहे। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए शिक्षकों को शिक्षा में सुधार के लिए अपने सुझाव एवं प्रस्ताव रखने के लिए प्रोत्साहित किया।

स्थायी तबादला नीति बनाने की मांग

सम्मेलन में शिक्षकों ने तृतीय श्रेणी अध्यापकों के लिए स्थायी स्थानांतरण नीति बनाकर स्थानांतरण करने की मांग प्रमुखता से उठाई। शिक्षकों का कहना था कि स्थानांतरण को लेकर स्पष्ट और पारदर्शी नीति होने से लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत तथा दूरस्थ क्षेत्रों में पदस्थापित शिक्षकों को राहत मिल सकेगी। इसके साथ ही नई शिक्षा नीति में आवश्यक सुधार करने, शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने तथा विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सभी संवर्गों के रिक्त पद भरने की मांग भी रखी गई।

नियमित डीपीसी और विद्यालयों में पद स्वीकृत करने पर जोर

सम्मेलन में सभी संवर्गों की नियमित डीपीसी करवाने की मांग की गई। शिक्षकों ने कहा कि पदोन्नति प्रक्रिया नियमित रहने से कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति का लाभ मिल सकेगा और विद्यालयों में भी विभिन्न पदों की उपलब्धता बेहतर होगी। शिक्षकों ने कक्षा के अनुसार विद्यालयों में पद स्वीकृत करने तथा सभी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षक के पद स्वीकृत करने की मांग रखी। इसके अलावा प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद स्वीकृत करने का प्रस्ताव भी रखा गया।

सत्र शुरू होते ही मिले निशुल्क पाठ्य पुस्तकें

सम्मेलन में निशुल्क पाठ्य पुस्तकों के वितरण में होने वाली देरी का मुद्दा भी उठाया गया। शिक्षकों ने मांग की कि विद्यार्थियों को शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही निशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं, ताकि पढ़ाई प्रभावित नहीं हो। इसके अलावा कर्मचारियों के पीएल एवं अन्य भुगतान समय पर करने, पे प्रोटेक्शन के नाम पर होने वाली कथित अवैध वसूली बंद करने तथा आरजीएस योजना में सुधार करने सहित अन्य मांगों पर भी चर्चा हुई।

15 प्रस्ताव पारित

सम्मेलन में विचार-विमर्श के बाद शिक्षक हितों, विद्यालयों की व्यवस्थाओं और सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करने से जुड़े कुल 15 प्रस्ताव पारित किए गए। संगठन की ओर से इन प्रस्तावों को शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

खुले अधिवेशन में रामावतार जांगिड़, जिला मंत्री इरफान अहमद, नरेंद्र झाझड़िया, थान सिंह सोमरा, रोहितास शर्मा, चरण सिंह कसवा, ओमप्रकाश, सुनील लोयल, सुभाष चंद्र, विक्रम सिंह, सुबे सिंह, मनोज यादव, कमल कुमार शर्मा, रामस्वरूप सैनी, अयाज अली, राकेश लमोरिया, रणजीत सिंह धायल, आयुष चौधरी, उमेद सिंह शेखावत, योगेश जाखड़, प्रताप सिंह, विनोद कुमार, राधेश्याम, जितेंद्र सिंह, सुनील कुमार सहित बड़ी संख्या में शिक्षकों ने अपने विचार एवं प्रस्ताव रखे।

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