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राहुल गांधी बोले- वोट चोरी के बाद अब पार्टी चोरी:ये सिर्फ ममता बनर्जी की लड़ाई नहीं; EC ने TMC के नाम-सिंबल पर रोक लगाई


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राहुल गांधी बोले- वोट चोरी के बाद अब पार्टी चोरी:ये सिर्फ ममता बनर्जी की लड़ाई नहीं; EC ने TMC के नाम-सिंबल पर रोक लगाई

राहुल गांधी बोले- वोट चोरी के बाद अब पार्टी चोरी:ये सिर्फ ममता बनर्जी की लड़ाई नहीं; EC ने TMC के नाम-सिंबल पर रोक लगाई

नई दिल्ली : कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनाव चिह्न और नाम के इस्तेमाल पर रोक लगाने के चुनाव आयोग के आदेश की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ये लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं है। वोट चोरी और सरकार चोरी के बाद अब पार्टी चोरी हो रही है।

राहुल गांधी ने शुक्रवार को X पर लिखा- पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्न- BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है। उन्होंने लिखा- जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं। वोट चोरी। सरकार चोरी। अब पार्टी चोरी – ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं।

21 जून 2022 को शिवसेना में उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट अलग हुए थे। इसी तरह 2 जुलाई 2023 को NCP में शरद पवार और अजित पवार गुट अलग हुए थे।

TMC के समर्थन में विपक्ष, कहा- चुनाव आयोग कठपुतली

  • कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल: बीजेपी ने असंवैधानिक रूप से AITC के नाम और चुनाव चिह्न पर कब्जा कर लिया है। यह मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की ओर से मोदी जी को देर रात दिया गया जन्मदिन का तोहफा है। चुनाव आयोग ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह बीजेपी के हाथों की कठपुतली के अलावा और कुछ नहीं है।’
  • शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत: इस पार्टी को ममता बनर्जी ने अपनी कड़ी मेहनत और संघर्ष के साथ बनाया था। तृणमूल कांग्रेस का राज्य और देश की राजनीति में अहम योगदान रहा है। जिस तरह शिवसेना बाला साहेब ठाकरे की पार्टी रही है, वैसे ही तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी की पार्टी है।’
  • सपा नेता अखिलेश यादव: चुनाव आयोग लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त करने के लिए फैसले ले तो उसके मान-सम्मान में वृद्धि होगी और कुछ नहीं कहना है, बस इतना पूछना है कि हमारे द्वारा इलेक्शन कमीशन में जमा किये गये एफिडेविट मिले क्या?’

दोनों गुटों ने अपना नाम और चुनाव चिह्न चुनाव आयोग को दिए

दरअसल, आयोग ने गुरुवार को दिल्ली में दोनों गुटों के प्रतिनिधियों को बैठक के लिए बुलाई थी। पार्टी में दो गुट हैं। एक का नेतृत्व ममता बनर्जी और दूसरे का अरूप रॉय कर रहे हैं। आयोग ने कहा कि दोनों गुट खुद को असली पार्टी बता रहे हैं। इसलिए इलेक्शन सिम्बल्स ऑर्डर, 1968 के नियमों के तहत इस विवाद पर फैसला लिया जाएगा। फिलहाल सिंबल और नाम के इस्तेमाल पर रोक का आदेश जारी किया गया है। TMC के दोनों गुटों ने अपनी पसंद के नए नाम और चुनाव चिह्न दे दिए हैं।

6 अक्टूबर को उपचुनाव, नए सिंबल पर लड़ेंगे उम्मीदवार

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव हैं। दोनों गुटों ने एक ही चिह्न पर उम्मीदवार उतारे थे। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी TMC धड़े से मोहम्मद एतेशामुल हक नंदीग्राम और सफीउद्दीन शेख रेजीनगर से चुनाव लड़ेंगे। वहीं, पूर्व सीएम ममता बनर्जी की TMC ने रविवार को नंदीग्राम से संचिता प्रधान (डे) और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार घोषित किया था।

चुनाव आयोग की जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है, लेकिन उल्टा वो उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को ही पलट देते हैं। यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है। – राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद

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