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अधिकारियों ने कागजों में की लीपापोती, धरातल पर समस्या जस की तस : ग्रामसेवक ने बीडीओ को लिखा समस्या खत्म कर दी गई हैं


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अधिकारियों ने कागजों में की लीपापोती, धरातल पर समस्या जस की तस : ग्रामसेवक ने बीडीओ को लिखा समस्या खत्म कर दी गई हैं

राजस्थान संपर्क पोर्टल पर शिकायत के बाद भी ग्रामीण परेशान; स्वच्छ भारत मिशन के दावों की देवास में खुली पोल

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : ​आबिद खान दाडून्दा

फतेहपुर : ​एक तरफ जहां सरकार ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाकर जनता को स्वच्छता का पाठ पढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ फतेहपुर के प्रशासनिक जिम्मेदार इसी मिशन की धज्जियां उड़ाने में लगे हैं। कागजों में सफाई की ‘जादुई झाड़ू’ फिर चुकी है, बीडीओ साहब को ऑल-क्लियर की रिपोर्ट सौंपी जा चुकी है, लेकिन धरातल की हकीकत यह है कि देवास गांव की सड़कों पर फैला कीचड़ आज भी प्रशासनिक तंत्र को मुंह चिढ़ा रहा है।

​कीचड़ में बचपन और बुढ़ापा, डेंगू का फैला खौफ
देवास गांव के कई प्रमुख रास्तों और मोहल्लों में लंबे समय से गंदे पानी व कीचड़ का जमावड़ा बना हुआ है। आलम यह है कि स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को हर रोज इसी सड़ांध के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। गांव में डेंगू और मौसमी बीमारियों का प्रकोप फैल चुका है, लेकिन शिकायत करने पर सिस्टम सिर्फ ‘कल-परसों’ का टालमटोल वाला झुनझुना पकड़ा रहा है। स्थानीय निवासी राकेश धारीवाल बताते हैं कि बार-बार की मौखिक और लिखित गुहार के बाद भी जिम्मेदार टस से मस नहीं हो रहे।

चली कागजी’ झाड़ू और ग्रामसेवक ने बीडीओ को भेजी भ्रामक रिपोर्ट
हाल ही में एक प्रशासनिक दस्तावेज (07/09/2026) सामने आया है, जिसने व्यवस्था के इस लीपापोती मॉडल को बेनकाब कर दिया है। ग्रामसेवक वंदना ने बीडीओ को बाकायदा लिखित पत्र भेजकर दावा कर दिया कि राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज शिकायत का निस्तारण कर दिया गया है उसे क्लोज सके दिया जाए और ‘झाड़ू लगवाकर’ कीचड़ हटा दिया गया है।

​लेकिन जब जनमानस शेखावाटी न्यूज की टीम ने मौके पर जाकर पड़ताल की, तो ग्रामसेवक के इस ‘अदृश्य सफाई अभियान’ की पोल खुल गई। कीचड़ और बदबू मारती गंदगी जस की तस मिली। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर ग्रामसेवक मैडम किसके दबाव या किस मेहरबानी के चलते ऐसी ‘कागजी झाड़ू’ चलाकर उच्च अधिकारियों को गुमराह कर रही हैं?

ग्रामसेवक ने भेजी बीडीओ को अधूरी रिपोर्ट

​6 साल से ‘गायब’ सरपंच, रिश्तेदारों का राज!
ग्रामीणों का आक्रोश सिर्फ गंदगी तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बीते 6 वर्षों में उन्होंने अपनी महिला सरपंच सुमन देवी का चेहरा तक नहीं देखा है। महिलाए अपनी समस्याएं सरपंच को सुनाने के लिए आतुर हैं। पंचायत में चौपाल लगाने या महिलाओं की समस्याएं सुनने के बजाय सरपंच पति और उनके निजी रिश्तेदार खुद ‘सरपंच’ बनकर घूमते हैं और गांव को बदहाली के रहमोकरम पर छोड़ दिया गया है। बड़ा सवाल यह हैं कि एक तरफ सरकार सफाई अभियान के दावे कर रही हैं तो दूसरी तरफ ग्रामसेवक कागजी लीपापोती का खेल खेलकर सरकार के दावों की पोल खोलने में लगी हैं। क्या जिला कलेक्टर इस मामले आप कोई विशेष जांच टीम बिठाकर कार्रवाई करेंगे ये देखना होगा।

ग्रामीणों ने की पोर्टल पर शिकायत

​जनता का सवाल: कागजों की लीपापोती कब तक?
जब हमारी टीम ने अधिकारियों से इस लीपापोती पर सीधा सवाल किया, तो वे बगलें झांकते नजर आए। ‘झाड़ू मरवाने’ के नाम पर फाइलें तो बंद की जा रही हैं, लेकिन धरातल पर घुटनों तक भरे कीचड़ का जवाब देने वाला कोई नहीं है। सवाल यह है कि क्या संपर्क पोर्टल पर फर्जी क्लोजर रिपोर्ट भेजकर उच्चाधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने वाले कर्मियों पर कोई कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी, या फिर ग्रामीणों को यूं ही बीमारियों के मुहाने पर जीने को मजबूर छोड़ा जाएगा?

​अब इनकी भींसूं लेते हैं।

​”मुझे जैसे ही पता चला, ग्रामसेवक को बोल दिया है। वह दोबारा मौके पर जाएंगी, निस्तारण करवा दिया जाएगा। मैं बिजी हूं।” – नरेंद्र कुमार, बीडीओ, पंचायत समिति, फतेहपुर

​”सफाई करवाई है हमने, 11 टैंकर गंदे पानी के निकलवाए हैं। बीच में चुनाव आ गए, जल्दी ही समस्या का समाधान करवा दिया जाएगा।” – कमलेश कुमार, सरपंच प्रतिनिधि, देवास

​”नहीं हुआ है तो और करवा देंगे, आपका इश्यू क्या है वो बताओ ना? अगर समस्या है तो दोबारा करवा देंगे। आप तो ऐसे बोल रहे हो जैसे वहां सफाई हुई ही नहीं। हमने वहां झाड़ू तक मरवाई है, फिर भी समस्या है तो दोबारा करवा देंगे।” – वंदना, ग्रामसेवक, देवास

​”सरपंच और ग्रामसेवक को सालों से मौखिक रूप से कह रहे हैं। जब समाधान नहीं हुआ तो मैंने राजस्थान संपर्क पोर्टल पर शिकायत डाली। इसके बाद आधी-अधूरी औपचारिकता करके शिकायत को बंद करने के लिए ग्रामसेवक मैडम ने बिना समस्या ठीक किए बीडीओ साहब को पत्र भेजकर मामले को दबाने का काम किया है।” – राकेश कुमार धारीवाल, स्थानीय निवासी, देवास

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