चूरू नगर निकाय चुनाव में समय कम नए पुराने चेहरे बागी और निर्दलीयो मैं मुकाबला रोचक : एम. ए .पठान
चूरू नगर निकाय चुनाव में समय कम नए पुराने चेहरे बागी और निर्दलीयो मैं मुकाबला रोचक : एम. ए .पठान
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : नगर निकाय चुनाव में इस बार मुकाबला बेहद रोचक और त्रिकोणीय हो गया है। चूरू से जनमानस शेखावाटी न्यूज़ के वरिष्ठ पत्रकार मोहम्मद अली पठान की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, शहर के सभी 60 वार्डों में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने उन्हीं के दलों के बागी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने ताल ठोक दी है, जिससे दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों का चुनावी गणित पूरी तरह से गड़बड़ा गया है।
पठान की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पार्टियों ने आखिरी दिनों तक डैमेज कंट्रोल की कोशिश की और बागियों को मनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया। इसके बावजूद कई वार्डों में असंतुष्ट नेता मैदान से पीछे नहीं हटे और बतौर निर्दलीय चुनावी समर में डटे हुए हैं।
वार्ड स्तर पर बागियों की यह मजबूत मौजूदगी सीधे तौर पर पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा रही है।
खासकर कुछ मुस्लिम बाहुल्य और अनुसूचित जाति के प्रभाव वाले वार्डों में निर्दलीयों का प्रभाव इतना गहरा है कि वे जीत-हार का मुख्य कारक (किंगमेकर) बनते नजर आ रहे हैं। पठान के विश्लेषण के अनुसार, टिकट वितरण को लेकर कार्यकर्ताओं में उपजा असंतोष अब बगावत का रूप ले चुका है, जिसका खामियाजा दोनों दलों के मुख्य उम्मीदवारों को भुगतना पड़ सकता है। इस ‘निर्दलीय फैक्टर’ के कारण चूरू नगर निकाय में बोर्ड बनाने की राह किसी भी दल के लिए आसान नहीं रह गई है।
चूरू नगर निकाय चुनाव में नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने और चुनाव -चिन्ह आवंटित होने के साथ ही चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। ओर नगर परिषद के 60 वार्डों में प्रत्याशियों ने प्रचार अभियान तेज कर दिया है। प्रत्याशी घर-घर जनसंपर्क कर मतदाताओं से समर्थन और आशीर्वाद की अपील कर रहे हैं। इस बार चुनाव मैदान में जहां अनुभवी और पुराने चेहरे अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं कई वार्डों में नए चेहरों ने भी चुनावी मैदान में उतरकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
राजनीतिक दलों से टिकट नहीं मिलने के बाद चुनाव मैदान में उतरे “बागी प्रत्याशी” भी कई वार्डों में पार्टी उम्मीदवारों के लिए चुनौती बनते नजर आ रहे हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में “निर्दलीय प्रत्याशियों” ने भी चुनावी समीकरण बदल दिए हैं। कुछ वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी मजबूत जनसमर्थन के साथ प्रमुख दलों के उम्मीदवारों को सीधी चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में कई वाडों में मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय होने के आसार हैं।
प्रत्याशियों के जनसंपर्क के साथ वार्डों में चुनावी चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। मतदाता भी प्रत्याशियों के पुराने कार्यों, नए वादों और स्थानीय मुद्दों को लेकर अपना रुख तय करने में जुटे हैं। ऐसे में इस बार चूरू के कई वाडों में मुकाबला बेहद कांटे का होने की संभावना है।
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