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शिक्षक दिवस पर शिक्षा की अलख जगाने वाले नेहरा परिवार की कहानी : नोबल शिक्षण समूह की शिक्षा यात्रा में जुड़ा नया गौरव, शिवानी ने यूनिवर्सिटी में हासिल की तृतीय रैंक


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शिक्षक दिवस पर शिक्षा की अलख जगाने वाले नेहरा परिवार की कहानी : नोबल शिक्षण समूह की शिक्षा यात्रा में जुड़ा नया गौरव, शिवानी ने यूनिवर्सिटी में हासिल की तृतीय रैंक

दादा ने बोया शिक्षा का बीज, पिता ने सींचा और बेटी की मेहनत ने परिवार का नाम किया रोशन

पचेरी : कुछ परिवारों की पहचान उनकी संपत्ति या कारोबार से होती है, लेकिन कुछ परिवार ऐसे भी होते हैं जिनकी असली पहचान उनकी सोच और आने वाली पीढ़ियों की उपलब्धियों से बनती है। देवलावास के नोबल शैक्षणिक समूह से जुड़े इंजीनियर संदीप नेहरा का परिवार शिक्षा को लेकर ऐसी ही पहचान बना रहा है। यहां शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य का आधार मानी जाती है।

इसी शिक्षा यात्रा में अब एक और उपलब्धि जुड़ी है। इंजीनियर संदीप नेहरा की बेटी शिवानी नेहरा ने इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय की बी.एड. अंतिम परीक्षा-2026 में विश्वविद्यालय स्तर पर तृतीय रैंक हासिल की है। शिवानी की इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है।

बीएससी में भी विश्वविद्यालय स्तर पर हासिल किया था दूसरा स्थान

शिवानी की सफलता किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। परिवार के अनुसार उन्होंने बनस्थली विद्यापीठ से बीएससी की शिक्षा प्राप्त की और वहां विश्वविद्यालय स्तर पर द्वितीय स्थान हासिल किया। इसके बाद बी.एड. में भी उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा का प्रदर्शन जारी रखा तथा इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में तृतीय रैंक प्राप्त की।

लगातार दो अलग-अलग उच्च शिक्षण संस्थानों में बेहतर प्रदर्शन को परिवार उनकी नियमित पढ़ाई, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण का परिणाम मानता है। वर्तमान में शिवानी प्रतियोगी सीजीएल परीक्षाओं की तैयारी भी कर रही हैं। परिवार के अनुसार उनके लिए विश्वविद्यालय में रैंक हासिल करना मंजिल नहीं, बल्कि आगे की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

फाइल फोटो- नोबल शैक्षणिक समूह के निदेशक इंजी. संदीप नेहरा व परिवार एवं सभी रिश्तेदारगण

दादा की सोच बनी पोती की प्रेरणा

शिवानी की उपलब्धि को परिवार स्वर्गीय एस.एस. नेहरा की शिक्षा संबंधी सोच से जोड़कर देखता है। स्वर्गीय एस.एस. नेहरा हरियाणा सरकार में पीआरओ पद से सेवानिवृत्त हुए थे और उन्होंने नोबल शैक्षणिक समूह की स्थापना की थी। उनका मानना था कि समाज को मजबूत बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम शिक्षा है। वे विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा के पक्षधर थे। उनका सपना था कि ग्रामीण क्षेत्र की बेटियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर डॉक्टर, आईएएस, आईपीएस और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आगे बढ़ें तथा अपने परिवार के साथ समाज और देश का नाम रोशन करें।

उनकी सोच थी कि शिक्षित और संस्कारवान बेटी केवल अपने मायके का ही नहीं, बल्कि ससुराल का भी नाम रोशन करती है और दो परिवारों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आज उनकी पोती विश्वविद्यालय में रैंक हासिल कर रही है और दोहितियां मेडिकल शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ रही हैं, तो परिवार इसे उनके सपने के साकार होने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानता है।

फाइल फोटो- नोबल सीनियर सेकेंडरी स्कूल देवलावास के परिसर में स्व. एसएस नेहरा के साथ परिवार के सदस्यगण

पिता के मार्गदर्शन से मिली लक्ष्य पर टिके रहने की सीख

शिवानी अपनी सफलता में पिता इंजीनियर संदीप नेहरा के मार्गदर्शन को भी महत्वपूर्ण मानती हैं। परिवार के अनुसार संदीप नेहरा ने पढ़ाई के दौरान उन्हें लगातार प्रोत्साहित किया और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखने के लिए प्रेरित किया।

संदीप नेहरा स्वयं भी शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं। परिवार के अनुसार उन्होंने एमएससी में स्वर्ण पदक तथा सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर से एमटेक में रजत पदक प्राप्त किया। खनन अभियंत्रण के क्षेत्र से जुड़े रहने के बाद वर्तमान में वे नोबल शैक्षणिक समूह, देवलावास के प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

बेटियों की शिक्षा पर जोर, शादी के खर्च से बेहतर शिक्षा में निवेश का संदेश

संदीप नेहरा बेटियों की उच्च शिक्षा को विशेष महत्व देते हैं। उनका मानना है कि ग्रामीण परिवेश में परिवार यदि बेटियों की पढ़ाई को प्राथमिकता दें तो वे आगे चलकर परिवार और समाज को सम्मान दिला सकती हैं। उनका संदेश है कि विवाह और अन्य सामाजिक आयोजनों में अनावश्यक खर्च करने के बजाय बेटियों की उच्च शिक्षा पर निवेश किया जाना चाहिए। शिक्षा ऐसी पूंजी है जो जीवनभर बेटी के साथ रहती है और उसे आत्मनिर्भर बनाने में मदद करती है। नेहरा परिवार की बेटियां और भांजियां इस सोच का उदाहरण बनकर सामने आई हैं।

 

भांजियों ने भी नीट में हासिल की सफलता

परिवार की शैक्षणिक उपलब्धियों में इंजीनियर संदीप नेहरा की भांजियों की सफलता भी शामिल है। परिवार के अनुसार मुस्कान चौधरी ने नीट-2021 में सफलता प्राप्त की और वर्तमान में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। वहीं दूसरी भांजी पलक चौधरी ने नीट-2022 में प्रथम प्रयास में 720 में से 653 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक 3906 हासिल की। परिवार दोनों की सफलता को स्वर्गीय एस.एस. नेहरा के उस सपने से जोड़कर देखता है, जिसमें वे चाहते थे कि परिवार की बेटियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ें और समाज की सेवा करें।

शिक्षा का माहौल घर से लेकर संस्था तक

नेहरा परिवार में शिक्षा की परंपरा केवल शिवानी या उनके भाई-बहन तक सीमित नहीं है। संदीप नेहरा की पत्नी सुमन नेहरा एमए, बीएड हैं और परिवार के अनुसार नोबल शैक्षणिक समूह में अकादमिक निदेशक की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

उनके पुत्र शिवम नेहरा एमएससी रसायन विज्ञान की शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं और वर्तमान में नोबल एजुकेशनल ग्रुप, देवलावास में प्रशासनिक निदेशक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। परिवार के अनुसार शिवम भी प्रतियोगी सीजीएल परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

रिश्तेदारों में भी शिक्षा और पेशेवर उपलब्धियों की लंबी कड़ी

परिवार की शिक्षा यात्रा रिश्तेदारों तक भी दिखाई देती है। संदीप नेहरा की बहन अर्चना नेहरा हरियाणा में सरकारी हिंदी व्याख्याता हैं। उनके पति मानसिंह चौधरी सेवानिवृत्त सरकारी व्याख्याता हैं और वर्तमान में नोबल साइंस अकादमी, पचेरी बड़ी में कैंपस निदेशक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

दूसरी बहन रिताशा नेहरा भी शिक्षण क्षेत्र से जुड़ी हैं और जयपुर में अध्यापन कर रही हैं, जबकि उनके पति प्रदीप चौधरी राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर में अधिवक्ता हैं। परिवार के अनुसार भांजे रक्षित चौधरी तकनीकी उच्च शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जबकि शुभम चौधरी बीआईटीएस पिलानी से एमबीए की पढ़ाई कर रहे हैं।

आर्थिक मजबूरी प्रतिभा के रास्ते में बाधा न बने-नेहरा परिवार की सोच

नोबल शैक्षणिक समूह के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाता है। संदीप नेहरा के अनुसार किसी विद्यार्थी की प्रतिभा केवल इसलिए नहीं रुकनी चाहिए कि उसका परिवार फीस वहन करने की स्थिति में नहीं है। विशेष रूप से जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं की शिक्षा को लेकर परिवार रियायत और सहयोग की सोच पर जोर देता है। यह विचार स्वर्गीय एस.एस. नेहरा की शिक्षा संबंधी विचारधारा से भी जुड़ा हुआ है।

तीन पीढ़ियों की कहानी बनी शिक्षा की विरासत

नेहरा परिवार की पूरी यात्रा को देखें तो यह केवल एक बेटी के विश्वविद्यालय में रैंक हासिल करने की कहानी नहीं है। यह तीन पीढ़ियों के बीच शिक्षा की सोच के हस्तांतरण की कहानी है। स्वर्गीय एस.एस. नेहरा ने शिक्षा को समाज निर्माण का माध्यम मानकर इसकी नींव रखी। उनके पुत्र इंजीनियर संदीप नेहरा ने इस सोच को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा क्षेत्र में अपनी भूमिका मजबूत की। अब तीसरी पीढ़ी के बच्चे अपनी उपलब्धियों से इस विरासत को नई पहचान दे रहे हैं। शिवानी की विश्वविद्यालय में तृतीय रैंक, मुस्कान और पलक की मेडिकल शिक्षा तथा परिवार के अन्य युवाओं की उच्च शिक्षा इस यात्रा की अलग-अलग कड़ियां हैं।

ग्रामीण बेटियों के लिए उपलब्धियां बनी संदेश

शिवानी की उपलब्धि और परिवार की अन्य बेटियों की सफलता ग्रामीण समाज के लिए भी एक संदेश देती है कि प्रतिभा किसी शहर या बड़े संस्थान की मोहताज नहीं होती। उचित अवसर, मार्गदर्शन और परिवार का सहयोग मिले तो ग्रामीण क्षेत्र की बेटियां भी उच्च शिक्षा और प्रतियोगी क्षेत्रों में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।

नेहरा परिवार की शिक्षा यात्रा में दादा का सपना, पिता का मार्गदर्शन और बेटियों की मेहनत एक साथ दिखाई देती है। शिवानी ने विश्वविद्यालय में तृतीय रैंक हासिल कर इस यात्रा में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है। दादा ने शिक्षा का बीज बोया, पिता ने उसे आगे बढ़ाया और अब तीसरी पीढ़ी अपनी उपलब्धियों से उस सोच को नई पहचान दे रही है। यही नेहरा परिवार की शिक्षा यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

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