खरगोन हिंसा मामले में APCR ने 11 आरोपियों को बरी कराया, अभियोजन साबित नहीं कर सका आरोप
खरगोन हिंसा मामले में APCR ने 11 आरोपियों को बरी कराया, अभियोजन साबित नहीं कर सका आरोप
खरगोन (मध्यप्रदेश) : मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में 10 अप्रैल 2022 को रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान हुई हिंसा के मामले में खरगोन के चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश नाथ ने 11 आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने 27 जुलाई 2026 को अपना फैसला सुनाया।
क्या था मामला
यह प्रकरण थाना खरगोन के अपराध क्रमांक 237/2022 और सेशन ट्रायल 75/2022 से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार भटवाड़ी मोहल्ले में शोभायात्रा के दौरान कुछ लोगों ने घरों पर पत्थरबाजी और पेट्रोल बम से हमला किया था। इस मामले में दंगा, आगजनी, आपराधिक साजिश, घर में घुसपैठ और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराओं में 11 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ था।
कोर्ट ने क्या कहा
न्यायालय में कुल 13 अभियोजन गवाह पेश किए गए। इनमें से 8 गवाह, जिनमें अधिकतर शिकायतकर्ता भी शामिल थे, अपने ही बयान से मुकर गए और कोर्ट में किसी भी आरोपी की पहचान नहीं कर सके।
कोर्ट ने पाया कि अभियोजन का पूरा मामला एकमात्र चश्मदीद गवाह के बयान पर टिका था, लेकिन वह बयान घटना के 51 दिन बाद दर्ज किया गया था और FIR में भी उसका नाम नहीं था। इसके अलावा गवाह के बयान में घटना के समय, हमलावरों की संख्या और पहचान को लेकर गंभीर विरोधाभास थे।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि जांच के दौरान आरोपियों की पहचान के लिए कोई टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड नहीं कराई गई। फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में भी जब्त सामान पर पेट्रोल, डीजल या मिट्टी का तेल नहीं मिला, जिससे पेट्रोल बम वाले आरोप कमजोर हो गए। इन सभी खामियों के चलते कोर्ट ने सभी 11 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए सभी धाराओं से बरी कर दिया।
कितने दिन जेल में रहे आरोपी
कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार सभी आरोपी मुकदमे के दौरान 462 दिन से लेकर 827 दिन तक जेल में रहे।
बरी होने वाले आरोपी
इबादत पिता अब्बास अली, सादिक पिता शकीर खान, अब्दुल्ला पिता युसुफ खान, साहेब उर्फ शाहिद पिता जाहिद, शेरया पिता मेहराज, फैजल पिता आजम खान, आजम पिता निजाम खान, शबीर पिता अब्दुल रशीद खान, इमरान पिता अमीर अली, मुस्ताक पिता लियाकत अली और राजिक पिता रमजान अली।
कोर्ट का आदेश
न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि यदि अपील नहीं होती है तो जप्तशुदा सामग्री, जली हुई सामग्री और बोतल कांच के टुकड़े अपील अवधि बाद नष्ट कर दिए जाएं। निर्णय की एक प्रति जिला मजिस्ट्रेट खरगोन को भी भेजी जाएगी।
APCR का बयान
इस मामले में आरोपियों की ओर से APCR की वकील रेखा श्रीवास्तव ने पैरवी की थी। एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) ने मध्य प्रदेश के खरगोन (मंडलेश्वर) के 4th अपर सेशन जज के उस फैसले का स्वागत किया है जिसमें सभी 11 आरोपियों को बरी कर दिया गया है।
APCR ने बताया कि यह मामला 10 अप्रैल 2022 को रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान भटवाड़ी मोहल्ला, खरगोन में हुई सांप्रदायिक हिंसा से संबंधित था। अभियोजन का आरोप था कि मुस्लिम पुरुषों के एक समूह ने हिंदू घरों पर पत्थर और पेट्रोल बम से हमला किया था, जिससे आवासीय संपत्ति और वाहनों को नुकसान पहुंचा था। उन पर दंगा, आगजनी, आपराधिक साजिश, घर में घुसपैठ और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत अपराध करने का आरोप था।
APCR की ओर से एडवोकेट रेखा श्रीवास्तव ने पूरे मामले में आरोपियों का पक्ष रखा। उन्होंने लगातार कहा कि अभियोजन का मामला विश्वसनीय साक्ष्यों से समर्थित नहीं है और आपराधिक कानून में आवश्यक सबूत के मानक पर खरा नहीं उतरता।
साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण करने के बाद, सेशन कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष किसी भी आरोपी की संलिप्तता को “उचित संदेह से परे” साबित करने में विफल रहा।
APCR ने बताया कि मुकदमे के दौरान 13 अभियोजन गवाहों के बयान हुए। इनमें से 8 गवाह, जिनमें लगभग सभी शिकायतकर्ता शामिल थे, अभियोजन के पक्ष में नहीं गए और कोर्ट में किसी भी आरोपी की पहचान नहीं कर सके। अभियोजन का पूरा मामला अंततः एकमात्र कथित चश्मदीद गवाह के बयान पर टिका था। लेकिन कोर्ट ने उस गवाह के बयान को अविश्वसनीय माना क्योंकि घटना के समय, हमलावरों की संख्या और उनके चेहरे ढके थे या नहीं, इस पर गंभीर विरोधाभास थे।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि उस एकमात्र गवाह का बयान घटना के 51 दिन बाद दर्ज किया गया था और इसका कोई कारण नहीं बताया गया। न ही उसका नाम FIR या मूल लिखित शिकायत में चश्मदीद के रूप में था।
फैसले में आगे कहा गया कि आरोपियों की पहचान विवादित होने के बावजूद जांच के दौरान कोई टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (TIP) नहीं कराई गई। इसके अलावा, फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट में जब्त सामान पर पेट्रोल, डीजल या मिट्टी के तेल के अवशेष नहीं मिले। इससे पेट्रोल बम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के आरोप काफी कमजोर हो गए।
इन गंभीर कमियों को देखते हुए, कोर्ट ने सभी 11 आरोपियों को “संदेह लाभ” देकर सभी आरोपों से बरी कर दिया।
यह बरी होना ऐसे समय में हुआ है जब मुकदमे के दौरान आरोपी पहले ही 462 से 827 दिनों तक जेल में रह चुके थे।
APCR गलत अभियोजन का सामना कर रहे लोगों को कानूनी सहायता देने और धर्म या पहचान की परवाह किए बिना उचित प्रक्रिया, निष्पक्ष सुनवाई और कानून के समक्ष समानता की संवैधानिक गारंटी की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है।
देश
विदेश
प्रदेश
संपादकीय
वीडियो
आर्टिकल
व्यंजन
स्वास्थ्य
बॉलीवुड
G.K
खेल
बिजनेस
गैजेट्स
पर्यटन
राजनीति
मौसम
ऑटो-वर्ल्ड
करियर/शिक्षा
लाइफस्टाइल
धर्म/ज्योतिष
सरकारी योजना
फेक न्यूज एक्सपोज़
मनोरंजन
क्राइम
चुनाव
ट्रेंडिंग
Covid-19






Total views : 2286636


