सादुलपुर में कारगिल विजय दिवस मनाया:वीरांगनाओं और पूर्व सैनिकों का किया सम्मान, राष्ट्र हित सर्वोपरि रखने की अपील
सादुलपुर में कारगिल विजय दिवस मनाया:वीरांगनाओं और पूर्व सैनिकों का किया सम्मान, राष्ट्र हित सर्वोपरि रखने की अपील
सादुलपुर : सादुलपुर में कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शहीद स्मारक पर एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई, साथ ही वीरांगनाओं और पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया गया।
शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया
कार्यक्रम की अध्यक्षता ओआईसी ईसीएचएस के इंचार्ज विंग कमांडर दिनेश कुमार ने की। समारोह का शुभारंभ शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर और दो मिनट का मौन रखकर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देने से हुआ। इस दौरान “भारत माता की जय” और “अमर शहीद अमर रहें” के नारों से वातावरण गूंज उठा।
वीरांगनाओं का किया सम्मान
वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि देश की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों की वीरांगनाओं का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक के लिए गर्व की बात है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शहीदों का बलिदान अविस्मरणीय है और आने वाली पीढ़ियां उनसे राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा लेती रहेंगी। कार्यक्रम में उपस्थित सभी वीरांगनाओं, माताओं, पूर्व सैनिकों और अतिथियों का स्वागत किया गया।
युवाओं से राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने की अपील
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विंग कमांडर दिनेश कुमार ने कारगिल युद्ध को भारतीय सेना के अदम्य साहस, अनुशासन और पराक्रम का स्वर्णिम अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों और विषम परिस्थितियों के बावजूद भारतीय सैनिकों ने दुश्मन को करारा जवाब देकर विजय प्राप्त की, जिससे पूरी दुनिया में भारतीय सेना की क्षमता और वीरता स्थापित हुई। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और सेना के शौर्य से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
विंग कमांडर दिनेश कुमार ने यह भी बताया कि कारगिल युद्ध में देश के कुल 527 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। इनमें चूरू जिले के 7 और राजगढ़ क्षेत्र के 6 वीर सपूत शामिल थे। उनका बलिदान पूरे क्षेत्र के लिए गौरव और प्रेरणा का स्रोत है।
वीरों को किया नमन
समारोह का समापन शहीदों के आदर्शों पर चलने, राष्ट्र की एकता-अखंडता बनाए रखने और देश सेवा के संकल्प के साथ कारगिल के अमर वीरों को नमन करते हुए हुआ। इस अवसर पर पूर्व अध्यक्ष कामरेड जगत सिंह पूनिया, डॉ. सोनिका सिहाग सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, वीरांगनाएं, गणमान्य नागरिक और युवा उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन कैप्टन राजवीर सिंह ने किया।
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