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करगिल विजय दिवस आज:शौर्य स्मृति…करगिल युद्ध ने बदली झुंझुनूं की परंपरा, शहीदों की याद में 360 प्रतिमाएं लगीं; शुभ काम से पहले इनकी पूजा


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करगिल विजय दिवस आज:शौर्य स्मृति…करगिल युद्ध ने बदली झुंझुनूं की परंपरा, शहीदों की याद में 360 प्रतिमाएं लगीं; शुभ काम से पहले इनकी पूजा

करगिल विजय दिवस आज:शौर्य स्मृति...करगिल युद्ध ने बदली झुंझुनूं की परंपरा, शहीदों की याद में 360 प्रतिमाएं लगीं; शुभ काम से पहले इनकी पूजा

झुंझुनूं : झुंझुनूं में शहादत की परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन शहीदों की याद को प्रतिमाओं और स्मारकों में सहेजने की नई रीत 1999 के करगिल युद्ध के बाद शुरू हुई। करगिल शहीदों के पार्थिव शरीर पूरे सैन्य सम्मान के साथ गांव-गांव पहुंचे तो लोगों ने वीरों की शौर्यगाथा पीढ़ियों तक जीवित रखने का संकल्प लिया। करगिल के 19 शहीदों की प्रतिमाओं से शुरू हुआ यह सिलसिला अब जिले के 489 शहीदों तक पहुंच चुका है। जिले में अब तक 360 से अधिक शहीदों की प्रतिमाएं लग चुकी हैं। इनमें करगिल के बाद शहीद हुए 151 जवान भी शामिल हैं। बाकी शहीदों की प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। जिले के हर गांव और ढाणी में शहीदों या स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं नजर आती हैं।

खुडानिया में बन रही शहादत की स्मृतियां…

खुडानिया गांव में शहीदों की प्रतिमाएं तैयार होती हैं। यहां 200 से अधिक प्रतिमाएं तैयार हैं और 600 का ऑर्डर मिला हुआ है। एक प्रतिमा पर करीब दो लाख खर्च होते हैं। मूर्तिकार वीरेंद्र के अनुसार, प्रतिमाएं तैयार होते ही शहीद के गांव भेज दी जाती हैं। पिछले आठ साल से सैनिक कल्याण बोर्ड के चेयरमैन प्रेम सिंह बाजौर अपने खर्च पर शहीद परिवारों को प्रतिमाएं बनवाकर दे रहे हैं।

प्रदेश में आठ साल में 700 से अधिक शहीदों की प्रतिमाएं लगीं:

खुडानिया निवासी मूर्तिकार वीरेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार, करगिल के बाद शहीद परिवारों में शहीद प्रतिमाओं को लगाने का जज्बा पैदा हुआ। करगिल में देश के 527 जवान शहीद हुए। इसमें झुंझुनूं जिले के 19 शहीद शामिल हैं। प्रदेश में पिछले आठ साल के दौरान 700 से अधिक शहीदों की प्रतिमाएं लगाई जा चुकी हैं। 200 से अधिक शहीद प्रतिमाएं बनकर तैयार हैं। एक हजार से अधिक प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं। जिले में अब तक 489 शहीद हुए हैं। जबकि करगिल के बाद 151 जवानों ने शहादत दी है। करगिल के बाद शहीद हुए अधिकांश जवानों की प्रतिमाएं उनके गांवों में लग चुकी हैं।

शहीदों को देवता मानते हैं गांव वाले

इन गांवों में शहीद स्मारक पर 15 अगस्त, 26 जनवरी और शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम होते हैं। शादी-विवाह और हर शुभ काम से पहले लोग शहीद स्मारक पर पहुंचकर नमन करते हैं। कई गांवों में शहीदों को देवताओं की तरह पूजने की परंपरा है।

धनूरी में 15 शहीदों की शौर्यगाथा सहेजने की तैयारी

पोसाना में पांच जवानों की प्रतिमाएं लगी हैं। स्टेट हाईवे 37 पर बस स्टैंड के पास एक ही स्मारक में छह शहीदों की प्रतिमाएं हैं। इनमें द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर 2009 तक के वीर बलिदानी शामिल हैं। मोहनपुरा भामरवासी में चार, जयपहाड़ी में चार तथा बगड़ और टीटनवाड़ में दो-दो प्रतिमाएं लगी हैं। जाबासर में 11 शहीदों का स्मारक है, जबकि धनूरी में 15 शहीदों का स्मारक बनाया जा रहा है।

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