‘मेलोडी बांटो, पेपर नहीं’, छात्रों का ‘टॉफी सत्याग्रह’:पुलिस से बोले- हम हिंसा का जवाब मिठास से देंगे; शिक्षा मंत्री का इस्तिफा हो
‘मेलोडी बांटो, पेपर नहीं’, छात्रों का 'टॉफी सत्याग्रह':पुलिस से बोले- हम हिंसा का जवाब मिठास से देंगे; शिक्षा मंत्री का इस्तिफा हो
झुंझुनूं : झुंझुनूं में छात्र आंदोलन बुधवार को दिन का आंदोलन ‘टॉफी सत्याग्रह’ के साथ खत्म हुआ। पेपर लीक के मामलों और दिल्ली छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध जताया गया। ‘मेलोडी बांटो, पेपर नहीं’ का संदेश देते हुए छात्रों ने पुलिस अधिकारियों, पुलिसकर्मियों, वकीलों और राहगीरों को टॉफी बांटी।
पुलिस अधिकारियों को भी टॉफी खिलाते हुए छात्रों ने कहा-हम हिंसा का जवाब हिंसा से नहीं, बल्कि मिठास से देंगे। आंदोलन खत्म होने के बाद छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, NTA को भंग कर पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने, जंतर-मंतर से हिरासत में लिए गए पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक और अन्य छात्रों की रिहाई समेत अपनी मांगों का ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा।

पुलिस अधिकारियों को भी खिलाई टॉफी
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल कलेक्ट्रेट परिसर में एडिशनल एसपी देवेंद्र सिंह राजावत से मिला और उन्हें पेपर लीक की समस्या से अवगत कराया। इसके बाद छात्रों ने उन्हें मेलोडी टॉफी दी, जिसे उन्होंने मुस्कुराकर स्वीकार कर लिया।
शुरुआत में कुछ पुलिसकर्मी टॉफी लेने में झिझक रहे थे, लेकिन छात्रों ने कहा, “सर, हम आपके ही बच्चे हैं, टॉफी तो ले लीजिए। दिल्ली में पुलिस ने हम छात्रों पर लाठियां बरसाईं, लेकिन हम हिंसा का जवाब हिंसा से नहीं, बल्कि मिठास और टॉफी से दे रहे हैं।” बच्चों की इस बात से पुलिसकर्मी भी प्रभावित हुए और उन्होंने टॉफी स्वीकार कर ली।



छात्र बोले- देश को अहिंसा का संदेश देना चाहते हैं
छात्र मोनू ने बताया कि आंदोलन के आखिरी दिन उन्होंने कुछ अलग और रचनात्मक करने का फैसला किया। पहले पुलिसकर्मी टॉफी लेने से मना कर रहे थे, लेकिन बाद में सभी ने स्वीकार कर ली। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य देश को यह संदेश देना है कि वे अहिंसा के रास्ते पर चलेंगे और किसी भी हाल में हिंसा का जवाब हिंसा से नहीं देंगे।
अधिकारियों ने आंदोलन की सराहना
तीन दिन तक आंदोलन पर नजर रख रहे पुलिस अधिकारियों ने छात्रों के अनुशासित और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की सराहना की। एडिशनल एसपी देवेंद्र सिंह राजावत ने कहा कि छात्रों ने पूरे आंदोलन के दौरान अनुशासन बनाए रखा, जो खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि विरोध करना उनका संवैधानिक अधिकार है, लेकिन अब आंदोलन समाप्त कर पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान देना चाहिए।
कोतवाली थानाधिकारी श्रवण कुमार ने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनकी सुरक्षा करना पुलिस की जिम्मेदारी है। इस दौरान एसएफआई के पंकज गुर्जर और योगेश कटारिया तथा एनएसयूआई के राहुल जाखड़ भी मौजूद रहे और उन्होंने छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया।
‘यह राजनीति नहीं, छात्रों के भविष्य का सवाल’, 4 मांगों का ज्ञापन सौंपा
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कांग्रेस पर छात्रों को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था, धरने पर बैठी छात्रा यशी ने कहा कि शिक्षा मंत्री असली मुद्दे से ध्यान भटका रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है, जबकि यह देश के लाखों छात्रों के भविष्य का सवाल है। तीन दिन का आंदोलन खत्म होने के बाद छात्रों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
इसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, NTA को भंग कर पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने, जंतर-मंतर से हिरासत में लिए गए पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक और अन्य छात्रों की रिहाई, स्टूडेंट मार्च की अनुमति देने तथा दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की निंदा जैसी चार प्रमुख मांगें शामिल हैं।
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